उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा विधायक आशा नौटियाल ने गैर हिंदुओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोग केदारनाथ धाम को बदनाम करने के लिए मांस, मछली और शराब जैसी चीजें परोसते हैं। इस पर कांग्रेस और मुस्लिम नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और इसे धर्म के नाम पर राजनीति करार दिया है।
विधायक आशा नौटियाल ने उठाई रोक की मांग
केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल ने कहा कि केदारनाथ धाम एक पवित्र स्थल है, लेकिन कुछ गैर हिंदू वहां मांस-मदिरा का सेवन कर धार्मिक माहौल को दूषित कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए। विधायक ने दावा किया कि राज्य सरकार भी इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है और जल्द ही कोई ठोस कदम उठाया जा सकता है।
कांग्रेस ने बीजेपी पर लगाया राजनीति करने का आरोप
इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि बीजेपी जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उठा रही है। उन्होंने कहा, “जब सरकार महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों पर विफल हो जाती है, तो वह धर्म के नाम पर राजनीति करने लगती है।” कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि कई धार्मिक स्थलों पर मुस्लिम समुदाय के लोग वर्षों से सेवा कर रहे हैं, ऐसे में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगाना गलत होगा।
मौलानाओं और मुस्लिम संगठनों की प्रतिक्रिया
देहरादून के शहर काजी मोहम्मद अहमद कासमी ने इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यदि सरकार कोई कानून बनाती है तो वह सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय को किसी धार्मिक स्थल से सिर्फ उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता।
वहीं, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि हाल ही में मुसलमानों की एंट्री पर बैन लगाने का चलन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “पहले महाकुंभ मेले में मुसलमानों की दुकानों पर पाबंदी लगी, फिर मथुरा की ब्रज होली में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगी और अब केदारनाथ में उन्हें प्रतिबंधित करने की मांग उठ रही है। यह देश की गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ है।”
धार्मिक संगठनों का समर्थन
बीजेपी विधायक की इस मांग को जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मस्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ केदारनाथ ही नहीं, बल्कि सभी हिंदू तीर्थस्थलों पर यह नियम लागू किया जाना चाहिए।
क्या कहती है सरकार?
राज्य सरकार ने अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। यदि प्रतिबंध को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय लिया जाता है, तो यह चारधाम यात्रा को भी प्रभावित कर सकता है।
राजनीतिक बहस और भविष्य की संभावनाएं
इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जहां बीजेपी इसे धार्मिक स्थल की पवित्रता से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे धर्म के नाम पर राजनीति बता रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस पर क्या फैसला लेती है और क्या केदारनाथ धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर कोई औपचारिक प्रतिबंध लगेगा या नहीं।




