दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद वापसी करने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अपने राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से गढ़ने में जुट गई है। पार्टी अब आम आदमी पार्टी (AAP) के पारंपरिक वोटबैंक को साधने के लिए झुग्गी बस्तियों और मुस्लिम समाज पर विशेष फोकस कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद इस अभियान की अगुआई कर रही हैं।
झुग्गी-झोपड़ियों में बढ़ती सक्रियता
बीजेपी लंबे समय से दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसे इसमें खास सफलता नहीं मिली। अब रेखा गुप्ता के नेतृत्व में यह रणनीति एक बार फिर जोर पकड़ रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही रेखा गुप्ता लगातार झुग्गी बस्तियों का दौरा कर रही हैं और वहां के लोगों को आश्वासन दे रही हैं कि उनकी झुग्गियां नहीं हटेंगी, बल्कि वहीं पर पक्के मकान दिए जाएंगे।
रविवार को सीएम रेखा गुप्ता वसंत कुंज के भंवर सिंह कैंप पहुंचीं, जहां उन्होंने झुग्गीवासियों से उनकी समस्याएं सुनीं और बीजेपी सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उनके साथ आरके पुरम के विधायक अनिल शर्मा और सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद थीं। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर बिना नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार झुग्गीवासियों में “भय और दुष्प्रचार” फैला रही थी, जबकि बीजेपी उनकी सुरक्षा और विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
इफ्तार पार्टियों में बढ़ती भागीदारी
दिल्ली में बीजेपी की राजनीति में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। पार्टी अब मुस्लिम समाज के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए रोजा इफ्तार पार्टियों में शिरकत कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता होली के तुरंत बाद से ही लगातार इफ्तार दावतों में हिस्सा ले रही हैं।
शनिवार को वह इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में दिल्ली हज कमेटी द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल हुईं, वहीं रविवार को उन्होंने दिल्ली बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा आयोजित दावत-ए-इफ्तार में भाग लिया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद, पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद भी मौजूद रहे।
इफ्तार पार्टी में शिरकत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन सामाजिक समरसता और सौहार्द को बढ़ाने का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति आपसी सम्मान, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। ऐसे कार्यक्रम समाज में एकजुटता और समरसता को और अधिक सशक्त करते हैं। इस देश में सभी के लिए जगह है और सभी को साथ लेकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं।”
मुस्लिम वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
दिल्ली में मुस्लिम समुदाय का बड़ा हिस्सा अब तक आम आदमी पार्टी के साथ रहा है। 2020 के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा AAP को समर्थन देता नजर आया था, जिससे बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अब पार्टी इस समीकरण को बदलने की कोशिश कर रही है।
इफ्तार पार्टियों में बढ़ती भागीदारी और मुस्लिम नेताओं को आगे लाने की कोशिश से यह साफ है कि बीजेपी दिल्ली में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए नई रणनीति अपना रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इफ्तार पार्टी में शामिल होकर इस रणनीति को और बल दिया। उन्होंने कहा, “जब हम इफ्तार में एक साथ बैठते हैं, खाते हैं और बातें करते हैं, तो एक अच्छा संदेश जाता है। पीएम मोदी देश के मुसलमानों की भलाई चाहते हैं और किसी को भी इस पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए।”
AAP के वोटबैंक को तोड़ने की रणनीति
झुग्गी-झोपड़ी वाले मतदाता और मुस्लिम समुदाय आम आदमी पार्टी के मजबूत वोटबैंक माने जाते हैं। बीजेपी अब इसी आधार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
बीजेपी ने इस रणनीति की झलक मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान ही दे दी थी, जब झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। अब सरकार उन्हें पक्का मकान देने और उनके विकास के लिए काम करने का वादा कर रही है।
वहीं, इफ्तार पार्टियों में बढ़ती भागीदारी से पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल हिंदू वोटों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि मुस्लिम समुदाय को भी साथ लेकर चलना चाहती है।
बीजेपी का नया अवतार?
दिल्ली की सत्ता में वापसी के बाद बीजेपी के बदले हुए सियासी तेवर साफ नजर आ रहे हैं। झुग्गी बस्तियों में सक्रियता और इफ्तार पार्टियों में भागीदारी से यह स्पष्ट है कि पार्टी अब समावेशी राजनीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि बीजेपी अब दिल्ली की राजनीति में नए समीकरण गढ़ने की कोशिश में है। अगर यह रणनीति सफल होती है, तो दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




