औरंगजेब की मजार मामले ने पकड़ा तूल, आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, हम मुर्दों से नहीं लड़ते… कब्र हटाना तालिबान का काम

औरंगजेब की मजार मामले ने पकड़ा तूल, आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, हम मुर्दों से नहीं लड़ते… कब्र हटाना तालिबान का काम

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से औरंगजेब की कब्र को लेकर चल रहे विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास शौर्य और बहादुरी से भरा हुआ है, लेकिन यह मुर्दों से लड़ाई नहीं करता। किसी की कब्र को हटाना तालिबान का काम है, सनातन धर्म इसकी अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का इतिहास दिखाता है कि हमारे वीरों ने हमेशा सनातन के सिद्धांतों का पालन किया है और कभी भी अपने दुश्मनों का अपमान नहीं किया।

आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान
हाल ही में महाराष्ट्र में रिलीज हुई मराठी फिल्म ‘छावा’ के बाद औरंगजेब को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस फिल्म में औरंगजेब को एक क्रूर शासक के रूप में दिखाया गया है, जिससे विवाद गहराता जा रहा है। इसके बाद समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने औरंगजेब को महान शासक बताया, जिससे बहस और तेज हो गई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब औरंगजेब की कब्र को हटाने की मांग उठने लगी है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “भारत मुर्दों से लड़ाई नहीं करता। हमारा देश वीरों और पराक्रमियों का देश है, लेकिन हम किसी की कब्र हटाने का काम नहीं करते। यह तालिबानियों की मानसिकता है। सनातन धर्म हमें सिखाता है कि दुश्मन के मरने के बाद भी उसका सम्मान करना चाहिए।”

वक्फ बोर्ड और धमकियों पर भी बोले आचार्य प्रमोद
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने वक्फ बोर्ड विवाद और आईएसआईएस (ISIS) की धमकियों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “भारत कभी भी आतंकवादियों से नहीं डरता। भारत कभी तालिबानियों से नहीं डरा, न ही कभी किसी की धमकी में आया है। धमकी देना आतंकवादियों का काम है, लेकिन भारत इससे प्रभावित होने वाला नहीं है।”

उन्होंने दो टूक कहा कि सनातन धर्म की परंपराएं मानवता और सहिष्णुता पर आधारित हैं। किसी की मृत्यु के बाद उसकी कब्र को नष्ट करना हमारी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। भारत ने हमेशा अपने मूल्यों को बनाए रखा है और आगे भी रखेगा।

औरंगजेब पर बढ़ता विवाद
औरंगजेब को लेकर राजनीतिक बयानबाजी बढ़ती जा रही है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में यह मुद्दा गर्माया हुआ है। समाज के एक वर्ग का कहना है कि औरंगजेब एक निर्दयी शासक था, जिसने हिंदुओं पर अत्याचार किए, मंदिरों को तोड़ा और जबरन धर्मांतरण कराया। वहीं, कुछ लोग उसे एक मजबूत प्रशासक के रूप में देखते हैं।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस बहस से अलग हटकर शांति और सहिष्णुता का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हमें अपने इतिहास से सीखना चाहिए, न कि उसे दोहराने की कोशिश करनी चाहिए। नफरत से कुछ हासिल नहीं होता। भारत को अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व है, और यह आगे भी विश्वगुरु बनने की राह पर रहेगा।”

आचार्य प्रमोद कृष्णम का यह बयान उस समय आया है जब औरंगजेब को लेकर देशभर में बहस चल रही है। उनका मानना है कि इतिहास से सबक लेना जरूरी है, लेकिन बदले की भावना से प्रेरित होकर मृतकों का अनादर करना भारतीय संस्कृति नहीं है। भारत आतंकवादियों या बाहरी ताकतों से डरने वाला देश नहीं है, और उसे अपनी परंपराओं और मूल्यों को बनाए रखना चाहिए।

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