श्रीनगर के मशहूर इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में इस साल 17 लाख से अधिक ट्यूलिप खिलने को तैयार हैं। यह गार्डन एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है, जो 55 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस साल यहां 74 किस्मों के ट्यूलिप देखने को मिलेंगे, जिनमें दो नई किस्में पहली बार शामिल की गई हैं।
तेजी से चल रही हैं तैयारियां
गार्डन को इस महीने के अंत में पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा और इसको लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल लाखों पर्यटक इस गार्डन की खूबसूरती को निहारने आते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इस बार भी ट्यूलिप की कलर थीम पर खास ध्यान दिया गया है, जिससे फूलों की खूबसूरती और निखर सके।
शिफ्ट टाइप रणनीति से गार्डन रहेगा अधिक समय तक खुला
ट्यूलिप विशेष तापमान में ही खिलते हैं, इसलिए गार्डन को अधिक समय तक खुला रखने के लिए विभाग ने शिफ्ट टाइप रणनीति अपनाई है। इसके तहत ट्यूलिप की कुछ क्यारियों को अंतराल के साथ लगाया जाता है, ताकि अधिक दिनों तक पर्यटक इनका आनंद ले सकें।
नई कलर थीम और दो नई किस्में शामिल
ट्यूलिप गार्डन के असिस्टेंट फ्लोरिकल्चर ऑफिसर आसिफ अहमद ने बताया कि इस साल गार्डन में एक नई कलर थीम जोड़ी गई है। इसके अलावा, दो नई किस्मों को भी शामिल किया गया है, जिससे कुल किस्मों की संख्या 74 हो गई है। ट्यूलिप के अलावा इस गार्डन में डेफोडिल, हाइसिंथ, मस्करी और अन्य वसंत फूल भी लगाए गए हैं।
हर साल बढ़ रहा है पर्यटकों का आकर्षण
पिछले साल करीब 4.65 लाख पर्यटकों ने इस गार्डन का दौरा किया था और इस साल यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
2007 में हुई थी गार्डन की स्थापना
इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन की स्थापना साल 2007 में हुई थी। तब के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस गार्डन की नींव रखी थी। शुरुआत में यहां सिर्फ 50,000 ट्यूलिप बल्ब लगाए गए थे, जो नीदरलैंड से मंगाए गए थे। धीरे-धीरे यह गार्डन लोकप्रिय होता गया और अब यहां लाखों की संख्या में ट्यूलिप लगाए जाते हैं।
पर्यटकों के लिए स्वर्ग समान दृश्य
हर साल मार्च-अप्रैल के दौरान जब यह गार्डन पूरी तरह से खिल जाता है, तो इसका नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। पर्यटक यहां ट्यूलिप के रंग-बिरंगे फूलों के बीच फोटो खिंचवाने और इसकी सुंदरता को निहारने के लिए दूर-दूर से आते हैं। इस साल भी गार्डन में बड़ी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है।




