बिहार, विधानसभा में आज वित्त मंत्री सम्राट चौधरी वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट पेश करेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित सभी प्रमुख नेता विधानसभा पहुंच चुके हैं। बजट सत्र की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, और चूंकि यह वर्ष बिहार के लिए चुनावी साल है, इसलिए इस बजट पर सत्तारूढ़ दल, विपक्ष, आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की विशेष नजर है। यह बजट आगामी विधानसभा चुनावों के सियासी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।
विपक्ष का प्रदर्शन और मांगें
बजट पेश होने से पहले ही विधानसभा के बाहर विपक्षी दलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने इस बजट को ‘सरकार का विदाई बजट’ करार दिया है। राजद के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने सरकार से सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि और गरीब महिलाओं के लिए 2,500 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देने की मांग की है। उन्होंने कहा, “बिहार की जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है। सरकार को चाहिए कि वह गरीबों और महिलाओं के लिए ठोस कदम उठाए, न कि सिर्फ जुमलेबाजी करे।”
बजट से उम्मीदें
बिहार की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों का सामना कर रही है। राज्य में बेरोजगारी दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, और बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर हैं। बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग भी लंबे समय से की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि वित्त मंत्री सम्राट चौधरी इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की घोषणा करेंगे। इसके अलावा, चुनावी साल को देखते हुए कुछ लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा भी संभव है, जैसे मुफ्त बिजली, राशन या नकद सहायता।
वित्त मंत्री की चुनौतियां
वित्त मंत्री सम्राट चौधरी के सामने इस बजट में विकास और लोक-लुभावन योजनाओं के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है, ताकि चुनावी साल में जनता का भरोसा जीता जा सके। सूत्रों के मुताबिक, इस बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
बजट की संभावित विशेषताएं
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष का बजट 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 2.79 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 7-8% अधिक होगा। इसमें कृषि, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
बिहार विधानसभा में आज पेश होने वाला बजट राज्य के विकास की दिशा और आगामी चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा। वित्त मंत्री सम्राट चौधरी के सामने विकास और लोक-लुभावन योजनाओं के बीच संतुलन बनाना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। अब देखना होगा कि यह बजट बिहार की जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है और राज्य के समग्र विकास में कितना योगदान देता है।




