राहुल गांधी की छाप: कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव, सामाजिक न्याय एजेंडे से मिलेगी संजीवनी?

राहुल गांधी की छाप: कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव, सामाजिक न्याय एजेंडे से मिलेगी संजीवनी?

नई दिल्ली, कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक बदलाव की शुरुआत कर दी है, जिसमें युवाओं को मौका देने के साथ-साथ  ओबीसी, दलित और अल्पसंख्यक नेताओं को प्राथमिकता दी गई है। यह बदलाव कांग्रेस के सामाजिक न्याय एजेंडे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

संगठन में बड़ा फेरबदल, कई नए चेहरे आए आगे
हाल ही में कांग्रेस ने दो राज्यों के महासचिव और नौ राज्यों के लिए नए प्रभारी नियुक्त किए हैं। इन नियुक्तियों में ओबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों को प्रमुखता दी गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है, जबकि सैयद नसीर हुसैन को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की जिम्मेदारी दी गई है।

दलित-ओबीसी नेताओं को तवज्जो, राहुल का नया सियासी दांव
कांग्रेस ने के. राजू को झारखंड, मीनाक्षी नटराजन को तेलंगाना, सप्तगिरी शंकर उल्का को मणिपुर-त्रिपुरा और कृष्णा अल्लावरु को बिहार का प्रभारी नियुक्त कर स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी ओबीसी, दलित और आदिवासी वोटबैंक को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी की रणनीति: जातीय समीकरण साधने की कोशिश
कांग्रेस ने अब तक अपने परंपरागत वोट बैंक (दलित-मुस्लिम-ब्राह्मण) पर फोकस किया था, लेकिन मंडल कमीशन के बाद ओबीसी राजनीति के उभार ने कांग्रेस को पीछे धकेल दिया। अब राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना, सामाजिक न्याय और दलित-ओबीसी नेतृत्व को तरजीह देकर एक नया सियासी एजेंडा सेट किया है।

क्या कांग्रेस को मिलेगा सियासी लाभ?
कांग्रेस के इस कदम से पार्टी को ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के वोटबैंक में वापसी की उम्मीद है। हालांकि, क्या यह बदलाव कांग्रेस के लिए गेम चेंजर साबित होगा? यह तो आगामी चुनावी नतीजे ही तय करेंगे।

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