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महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बने मुमताज अली खान, कौन है ये मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु

महाकुंभ में आकर्षण का केंद्र बने मुमताज अली खान, कौन है ये मुस्लिम आध्यात्मिक गुरु

प्रयागराज, महाकुंभ में जहां साधु-संत और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वहीं एक विशेष शिविर लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह शिविर है प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु श्री एम का, जिनका असली नाम मुमताज अली खान है। धर्म, योग और आध्यात्मिकता की उनकी अनूठी विचारधारा ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।

केरल से हिमालय तक: एक अनूठी आध्यात्मिक यात्रा
6 नवंबर 1949 को केरल के त्रिवेंद्रम में जन्मे श्री एम बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर झुके थे। मात्र 19 वर्ष की उम्र में वे घर छोड़कर हिमालय की गुफाओं में चले गए, जहां कई संतों से उन्होंने दीक्षा ली और आत्मज्ञान की राह पर आगे बढ़े।

गुरु महेश्वरनाथ बाबा से दिव्य मिलन
श्री एम के अनुसार, जब वे 8 वर्ष के थे, तब त्रिवेंद्रम में उनकी मुलाकात गुरु महेश्वरनाथ बाबा से हुई। बाबा ने उन्हें बताया कि वे पूर्व जन्म से जुड़े हुए हैं। कुछ वर्षों बाद बद्रीनाथ की गुफाओं में गुरु से पुनः मिलन हुआ, जहां तीन वर्षों की गहन साधना के बाद उनका आध्यात्मिक जीवन एक नई दिशा में बढ़ा।

सत्संग फाउंडेशन: मानवता के लिए आध्यात्मिक सेवा
श्री एम ने अपने गुरु के मार्गदर्शन में “सत्संग फाउंडेशन” की स्थापना की, जिसका उद्देश्य धर्म की सीमाओं से परे जाकर सच्चे आध्यात्मिक ज्ञान की खोज करना है। उनका मानना है कि सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से नहीं, बल्कि आंतरिक अनुभूति से ही आत्मज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।

महाकुंभ में श्री एम का विशेष शिविर
महाकुंभ में श्री एम का शिविर आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया है। भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं। श्री एम सत्संग, योग और ध्यान के माध्यम से मानव सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश दे रहे हैं।

पद्म भूषण से सम्मानित आध्यात्मिक विभूति
श्री एम को वर्ष 2020 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। वे न केवल योग और ध्यान के क्षेत्र में अग्रणी हैं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय हैं। उनके द्वारा स्थापित स्कूल, अस्पताल और सेवा केंद्र हजारों लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं।

श्री एम का संदेश: धर्म से ऊपर उठकर आत्मज्ञान की खोज
श्री एम कहते हैं—
“हम केवल शरीर तक सीमित नहीं हैं। हमें आत्मा को भी समझना होगा। धर्म से ऊपर उठकर सच्चे ज्ञान की खोज ही वास्तविक आध्यात्मिकता है।”

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