महाकुंभ में राष्ट्रीय गौरव:आध्यात्मिक नेताओं ने किया राष्ट्र प्रेम का आह्वान

महाकुंभ में राष्ट्रीय गौरव:आध्यात्मिक नेताओं ने किया राष्ट्र प्रेम का आह्वान

प्रयागराज, महाकुंभ में आध्यात्मिक नेता मोरारी बापू, स्वामी चिदानंद सरस्वती – ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम के आध्यात्मिक प्रमुख और साध्वी भगवती सरस्वती ने 76वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर महाकुंभ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया.

ध्वजारोहण के दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित थे। मोरारी बापू ने इस अवसर पर कहा, “गणतंत्र दिवस हमारे संविधान की शक्ति और देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमें अपने अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी निभाना है।”

स्वामी चिदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि हमारे देश की एकता, शांति और स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और राष्ट्र निर्माण के लिए अपना योगदान दें।

साध्वी भगवती सरस्वती ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “गणतंत्र दिवस हमें यह सिखाता है कि देश के हर नागरिक का योगदान महत्वपूर्ण है। धर्म, भाषा और जाति से ऊपर उठकर हमें एकता और शांति के मार्ग पर चलना चाहिए।”

महाकुंभ के इस आयोजन ने आध्यात्मिकता और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीतों और भजन की प्रस्तुतियों ने माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाकर तिरंगे को सलामी दी और भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की।

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