महाकुंभ में आए “गोल्डन बाबा” को मिला 251 किलो का स्वर्ण सिंहासन उपहार, दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ का मुख्य आकर्षण इन दिनों श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़े के पीठाधीश्वर अवधूत बाबा आचार्य महामंडलेश्वर अरुण गिरी का 251 किलो सोने से निर्मित स्वर्ण सिंहासन बन गया है। सेक्टर-14 में स्थापित इस सिंहासन को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। साधु-संतों और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण महाकुंभ के इस विशाल आयोजन में यह सिंहासन विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।

महामंडलेश्वर अरुण गिरी, जिन्हें श्रद्धालु ‘गोल्डन बाबा’ के नाम से भी जानते हैं, स्वर्ण आभूषण धारण करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी इसी पहचान को ध्यान में रखते हुए उनके एक शिष्य ने यह भव्य सिंहासन भेंट किया है। सिंहासन 251 किलो शुद्ध सोने से बना है, जिसमें की गई नक्काशी इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है। इसे तैयार करने में चार महीने का समय लगा, लेकिन इसकी लागत गोपनीय रखी गई है।

अमृत स्नान का मुख्य आकर्षण
महाकुंभ के मौनी अमावस्या के दिन अमृत स्नान के दौरान महामंडलेश्वर अरुण गिरी इस स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होकर स्नान करेंगे। इस भव्य सिंहासन के साथ-साथ सोने के मंच और स्टूल ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर इस सिंहासन की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं में इसे देखने की उत्सुकता बढ़ गई है।

स्वर्ण सिंहासन के आध्यात्मिक कारण
इस स्वर्ण सिंहासन के निर्माण के पीछे आध्यात्मिक पहलू भी हैं। पवित्र धातु स्वर्ण को धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथों में दिव्यता और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। श्रीमद्भगवद् गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वर्ण को दिव्यता का प्रतीक बताया है, जबकि रामायण में भी स्वर्ण का उल्लेख किया गया है। इसी पवित्रता को ध्यान में रखते हुए यह सिंहासन तैयार किया गया है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है।

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