शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर पर सेना कमांडर पूर्वी कमान, लेफ्टिनेंट जनरल आरपी कलिता ने ट्रांस-ईस्टर्न कमांड कार रैली “पूर्वोत्तर भारत परिक्रमा” को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 23 मार्च 1931 को भारत के तीन तीन वीर स्वतंत्रता सेनानियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।
सेना के प्रवक्ता ने बताया कि रैली पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और मेघालय राज्यों में लगभग 4000 किलोमीटर की कुल दूरी तय करेगी। यह रैली सिक्किम में नाथू-ला और अरुणाचल प्रदेश में से-ला टनल और बुम-ला, कोहिमा में युद्ध स्मारक और कई एतिहासिक स्थानों पर जाएगी।
इस मौके पर कलिता ने कहा, “पूर्वोत्तर भारत परिक्रमा” भारत की आजादी की साल भर चलने वाली ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ का हिस्सा है, जिसमें पिछले 75 वर्षों में देश की यात्रा और उसके लोगों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रवाद को मजबूत करना और युवाओं को भारतीय सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना है। यह पहल पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने, पर्यटन को प्रोत्साहित करने और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों और देश के बाकी हिस्सों के बीच बंधन को मजबूत करने के लिए एक अद्वितीय मंच के रूप में काम करेगी।
रैली के दौरान वीरता पुरस्कार विजेताओं और परमवीर चक्र विजेताओं ने विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में प्रेरक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला की भी योजना बनाई है। यह तेजपुर स्थित गजराज कोर द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका समापन 12 अप्रैल को मेघालय के उमरोई होगा। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ की राष्ट्रीय परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र विभाग (डीओएनईआर) के तहत उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) के सहयोग से आयोजित की जा रही है।




