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नहीं मनाई जाएगी नेताजी की तेरहवीं, जानिए आखिर क्यों सैफई के आसपास के गांव में खत्म है ये परंपरा

नहीं मनाई जाएगी नेताजी की तेरहवीं, जानिए आखिर क्यों सैफई के आसपास के गांव में खत्म है ये परंपरा

लखनऊ: हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार किसी भी व्यक्ति के निधन के 13वें दिन उसकी आत्मा की शांति के लिए कार्यक्रम किया जाता है, जिसको तेहरवीं कहा जाता है। मगर पूर्व रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उनकी तेरहवीं का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसकी जगह सिर्फ शांति पाठ व हवन पूजन का कार्यक्रम किया जाएगा। दरअसल नेताजी जब छोटे थे तो सैफई में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के 13 दिन बाद तेहरवीं का आयोजन होता था। हालांकि बाद में इस परंपरा को खत्म कर दिया क्योंकि इससे परिवार पर अतिरिक्त बोझ पड़ता था। लिहाजा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसी परंपरा को निर्वाहन करने का फैसला लिया है। 

नेताजी ने समाज सुधारक के तौर पर किया था काम
सैफई के आस-पास के एक-दो जिलों में अब तेरहवीं की परंपरा पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। दरअसल जब नेताजी छोटे थे तब सैफई और आसपास इलाकों में मृतक व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए कार्यक्रम का आयोजन होता था। जब मुलायम सिंह यादव बड़े हुए और राजनीति में आए तो उन्होंने समाज सुधारक के तौर पर काम किया। उन्होंने समाज सुधारकों के साथ मिलकर इस परंपरा को खत्म करने की शुरूआत की और धीरे-धीरे यहां तेरहवीं का कार्यक्रम किया जाना बंद हो गया। उसके बाद से ही लोग इसकी जगह शांति पाठ के साथ हवन और पूजा पाठ करने लगे। इसी वजह से नेताजी की भी तेहरवीं नहीं की जाएगी।

हर वर्ग के लोगों ने तेरहवीं परंपरा को कर दिया खत्म
नेताजी ने जब समाज सुधारकों के साथ इस परंपरा को बहुत ही सोच-समझकर खत्म किया था। 13वें दिन भोज का कार्यक्रम रखा जाता था, इस वजह से गरीब वर्ग के लोगों पर आर्थिक बोझ पड़ता था। समाज सुधारकों ने इन परंपराओं को खत्म करने का जोर इसलिए दिया ताकि गरीबों पर इसका दबान नहीं पड़े। सैफई समेत आसपास के इलाकों में तेरहवीं की परंपरा को खत्म हो जाने के बाद से मध्यमवर्ग, गरीब वर्ग समेत उच्च तबके के लोगों के लिए एक ही परंपरा शुरू हो गई। उसके बाद से ही हर वर्ग के लोग इस परंपरा को मानते चले आ रहे है।

गंगा में विसर्जित कर अखिलेश ने गंगा में लगाई थी डूबकी
बता दें कि दिग्गज समाजवादी नेता व समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव पंचतत्व में विलीन हो चुके हैं। उनके पैतृक गांव सैफई में हजारों की संख्या में लोगों ने उनकी अंतिम यात्रा में शाम‍िल हुए और उनके बड़े बेटे अखिलेश यादव ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। मुखाग्नि देने से पहले सपा प्रमुख अखिलेश ने सिर पर समाजवादी पार्टी (सपा) की लाल टोपी लगाई। उसके अगले दिन अखिलेश पिता की अस्थियों को लेने गए और उसके बाद परिवार के साथ शुद्ध‍िकरण संस्‍कार में शाम‍िल हुए। नेताजी की अस्थियों को गंगा में विसर्जित कर अखिलेश ने डूबकी भी लगाई थी। इसके बाद अब कल 19 अक्टूबर को राज्य की संगम नगरी में अस्थियों को प्रवाहित करने जाएंगे। 

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