2023 विधानसभा चुनाव से पहले त्रिपुरा में मजबूती तलाश रही तृणमूल कांग्रेस को चोट लगती दिख रही है। खबर है कि पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी पूर्वोत्तर राज्य में दल बदल करने वाले नेताओं से परेशान है। हालांकि, प्रदेश इकाई ने हालात बदलने और दल बदलुओं टीएमसी से दोबारा जुड़ने की बात कही है। फिलहाल, राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
राज्य में टीएमसी लगातार खुद को भाजपा का विकल्प बताने की कोशिश में है। अब पार्टी से अलविदा कहने वाले शीर्ष पदाधिकारी बापतू चक्रवर्ती ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि पार्टी, भाजपा का विरोध करने का केवल नाटक कर रही है। जबकि, वह उसकी बी-टीम है। चक्रवर्ती ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है। इधर पार्टी ने तमाम आरोपों से इनकार किया है।
त्रिपुरा इकाई के प्रभारी राजीव बनर्जी कई पार्टी कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने की बात से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती निजी कारणों के चलते गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वह कई वापसी की संभावनाओं के साथ कई दल बदलुओं का साथ संपर्क में हैं। खास बात है कि जून में हुए उपचुनाव में टीएमसी के खाते में केवल 2.86 फीसदी वोट ही आ सके थे। उस दौरान भाजपा को चार में से तीन सीटों पर जीत मिली थी। जबकि, कांग्रेस के खाते में एक सीट आई थी।
पुरानी हैं कोशिशें
1990 के समय में पहली बार टीएमसी ने त्रिपुरा में विस्तार की कोशिश की थी। वहीं, 2016 में टीएमसी में कांग्रेस के 6 विधायक दल बदल कर आए। हालांकि, इसके एक साल बात ही तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे और एक ने कांग्रेस का रुख किया था। 2018 विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 0.30 प्रतिशत वोट मिले थे, जो बीते साल निकाय चुनाव में बढ़कर 16.39 फीसदी हो गया।
कांग्रेस और भाजपा का क्या कहना है
कांग्रेस नेता सरिता लैतफलांग का कहना है कि कांग्रेस ही एकमात्र पार्टी है, जो 2023 में भाजपा को कड़ा मुकाबला दे सकती है। वहीं, भाजपा नेता नवेंदु भट्टाचार्य कहते हैं कि टीएमसी ने कई बार त्रिपुरा में मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, ‘हमें नहीं लगता कि वे राजनीतिक रूप से प्रासंगिक हैं। हमें दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीतने का भरोसा है।’




