नई दिल्ली. देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने सोमवार(25 जुलाई) को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में पदभार ग्रहण किया। इससे पहले द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर यहां रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी से मुलाकात की। दोनों ने मुर्मू को पदभार ग्रहण करने के लिए बधाई दी। शपथ ग्रहण से पहले मुर्मू ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी थी। इस दौरान उन्हें 21 तोपों की शानदार सलामी दी गई। भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई। भारत की 15वीं राष्ट्रपति मुर्मू ने 18 जुलाई को हुई वोटिंग में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराया था। काउंटिंग 21 जुलाई को हुई थी। मुर्मू के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में उनके गृह राज्य ओडिशा से 64 खास मेहमान पहुंचे हैं। सभी मेहमानों के लिए लंच का इंतजाम राष्ट्रपति भवन में किया जा चुका है।
मुर्मू के लिए विपक्षी खेमे के 125 विधायकों और 17 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की थी। मुर्मू को सांसदों और विधायकों के 64 प्रतिशत से अधिक वोट मिले। मुर्मू को मिले वोटों की वैल्यू 6,76,803 और सिन्हा को मिले वोटों की वैल्यू 3,80,177 है। मुर्मू ऐसी पहली राष्ट्रपति हैं, जो देश की आजाादी के बाद पैदा हुईं। यानी वे सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति हैं। इसके अलावा राष्ट्रपति बनने वाली दूसरी महिला भी हैं।
रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हुआ
रामनाथ कोविंद का राष्ट्रपति के तौर पर कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो गया। 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू से पहले सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी (Neelam Sanjiva Reddy) रहे हैं, जिनकी राष्ट्रपति बनते समय उम्र 64 साल दो महीने थी। इससे पहले कोविंद ने शनिवार को संसद में अपना विदाई भाषण दिया था। इसमें उन्होंने पार्टियों से राष्ट्रहित में दलगत राजनीति से ऊपर उठने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि लोगों के कल्याण के लिए पार्टियों को दलगत राजनीति से दूर रहना चाहिए। उन्होंने नागरिकों से विरोध व्यक्त करने और अपनी मांग पूरा कराने के लिए गांधीवादी तरीकों का इस्तेमाल करने को भी कहा था।
जानिए नई राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के बारे में ये बातें
करीब 25 साल पहले द्रौपदी मुर्मू ने एक पार्षद बनकर अपना राजनीति करियर शुरू किया था। आज वे देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंची हैं। द्रौपदी मुर्मू सबसे पहले 1997 में ओडिशा के रायरंगपुर नगर पंचायत से पार्षद का चुनाव जीती थीं। फिर तीन साल बाद 2000 में वो रायरंगपुर से पहली बार विधायक बनीं। 2002 से 2004 के बीच भाजपा-बीजेडी सरकार में मंत्री बनाई गईं। 18 मई 2015 को द्रौपदी मुर्मू झारखंड की 9वीं राज्यपाल बनीं।




