Hyderabad gang rape:पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी क्यों की? NCPCR ने मांगा जवाब,भाजपा ने की CBI जांच की मांग

Hyderabad gang rape:पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी क्यों की? NCPCR ने मांगा जवाब,भाजपा ने की CBI जांच की मांग

हैदराबाद के गैंग रेप मामले(Hyderabad gang rape case) ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कठखरे में लाकर खड़ा कर दिया है। इस मामले में आरोपियों के हाईप्रोफाइल फैमिली से जुड़े होने से पुलिस ने FIR दर्ज करने में देरी की। साथ जिस पब में पीड़िता गई थी, उसे लेकर भी पुलिस ने कुछ खास एक्शन नहीं दिखाया। अब टॉप चाइल्ड राइट्स बॉडी यानी नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स  (NCPCR) ने FIR दर्ज करने में देरी पर हैदराबाद पुलिस से जवाब मांगा है। साथ ही पब के खिलाफ भी एक्शन लेने को कहा है।

भाजपा ने मामले की जांच CBI से कराने की मांग उठाई
पहले बता दें कि 28 मई को पार्टी के बाद पब से बाहर निकली 17 साल की एक लड़की को कुछ लड़कों ने घर छोड़ने के बहाने अपनी मर्सिडीज कार में बिठा लिया था। फिर सुनसान और अंधेरे इलाके में कार में गैंगरेप किया था। पुलिस ने इस मामले में घोर लापरवाही बरती। जब मामला तूल पकड़ा, तब जाकर 5 में से तीन आरोपियों को पकड़ा। तीनों हाईप्रोफाइल फैमिली से हैं। इस बीच तेलंगान भाजपा चीफ बंद संजय ने इस मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। संजय ने शनिवार को मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को इस संबंध में पत्र लिख लिखा है।

pub के खिलाफ भी पुलिस से एक्शन लेने को कहा
NCPCR ने नाबालिगों को एंट्री की अनुमति देने के लिए पब के खिलाफ भी FIR दर्ज करने की मांग की है। कमिशन ने पाया है कि घटना 28 मई को हुई थी, लेकिन FIR 31 मई को दर्ज की गई है। यानी घटना के तीन दिन बाद। FIR दर्ज करने में देरी पर NCPCR ने शुक्रवार को हैदराबाद पुलिस को लिखे एक पत्र में कहा कि यह मामला चिंता का विषय है। इसके कारण बताए जाएं और संबंधित दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और आयोग को अवगत कराया जाए। आयोग ने पुलिस से इसका भी ध्यान रखने के कहा कि जांच के दौरान पीड़िता की पहचान उजागर न हो।

सदमे में थी लड़की, इसलिए तब बहुत कुछ नहीं बता सकी
पुलिस के अनुसार, लड़की के पिता ने 31 मई को शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके साथ छेड़छाड़ की गई हो सकती है, लेकिन वह यह नहीं बता सकती कि क्या हुआ? क्योंकि वह सदमे की स्थिति में थी। NCPCR ने कहा कि नाबालिगों को पब में एंट्री की इजाजत देने गंभीर चिंता का विषय है। इसलिए आयोग का विचार है कि उस पब के खिलाफ भी FIR दर्ज की जानी चाहिए। पुलिस से 7 दिनों के अंदर इस मामले में जवाब देने को कहा गया है।

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