आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया- प्रशांत किशोर के आने की आहट से क्यों घबराए थे सीनियर कांग्रेस नेता

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया- प्रशांत किशोर के आने की आहट से क्यों घबराए थे सीनियर कांग्रेस नेता

नई दिल्ली, नावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के लंबे समय से कांग्रेस पार्टी में जाने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, कुछ दिनों पहले ही उन्होंने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस के साथ नहीं जा रहे हैं। कांग्रेस के साथ कई दौर की बातचीत के बाद उन्होंने पार्टी का ऑफर ठुकरा दिया था। राजनीति में पीके को नए-नए प्रयोग करने में ‘माहिर’ रणनीतिकार के तौर पर देखा जाता है। वहीं, अब एक ट्वीट कर प्रशांत किशोर ने अलग संकेत दिए हैं और माना जा रहा है कि वे आने वाले समय में अपना राजनीतिक दल खड़ा कर सकते हैं। इस बीच, कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया है कि पीके के कांग्रेस में शामिल होने की आहट के बीच कुछ वरिष्ठ नेता घबराए हुए थे।

प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर कहा कि उन्होंने राजनीति में 10 सालों में काफी उतार-चढ़ाव देखे और अब मुद्दों एवं जनसुराज के मार्ग को बेहतर ढंग से समझने के लिए रियल मास्टर्स यानी जनता तक जाने का समय आ गया है। इस ट्वीट के बाद बिहार में राजनीति गरमाई हुई है। न्यूज24 के शो ‘राष्ट्र की बात’ के दौरान एंकर मानक गुप्ता ने पूछा कि अगर डिजिटल तरीके से युवाओं को टारगेट करते हैं पीके तो इससे क्या भाजपा के वोट बैंक पर असर पड़ेगा?

इस पर शांतनु गुप्ता ने कहा, “कांग्रेस की स्थिति के कारण बहुत से लोगों को लग रहा है कि वे विपक्ष की जगह ले सकते हैं, लेकिन एक-दो चुनाव में आप सरकार बना लेंगे और राष्ट्रीय स्तर पर सरकार बना लेंगे.. ये मेरे नजरिए से मुमकीन नहीं है। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में उस स्पेस को लेकर दिखाया। इसके बाद पंजाब में उनकी जीत के बाद दिखता है कि 5-7 साल के प्रयोग के बाद आप राजनीति में कुछ कर सकते हैं। बिहार के हालात की बात करें तो प्रशांत किशोर को भी जरूरी घटक दिखते हैं और वे कुछ सालों से राजनीति में काम रहे हैं, उनके पास टीम भी है। लेकिन जो भी है, एक अच्छा प्रयोग देखने को मिल सकता है।”

सीनियर कांग्रेस नेता क्यों घबराए हुए थे?

वहीं, प्रशांत किशोर के ट्वीट के बारे में कांग्रेस के आचार्य प्रमोद कृष्णम का कहना था, “प्रशांत किशोर का रिपोर्ट कार्ड ज्यादातर बेहतर ही रहा है, उनके मन के भाव को कांग्रेस के नेताओं ने भी पढ़ लिया था कि ये अब रणनीति बनाने नहीं आ रहे हैं, ये नेता बनकर आ रहे हैं। कांग्रेस के कुछ बड़े नेता प्रशांत किशोर के राजनीतिक स्वरूप को स्वीकार नहीं करते। कांग्रेस नेताओं को लग रहा था कि इस जर्जर इमारत की मरम्मत करने के लिए एक व्यक्ति आ रहा है। उनको डर था कि ये आदमी (पीके) इस इमारत का मालिक बन जाएगा।”

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