नई दिल्ली, यूक्रेन संकट के बीच भारत पर अमेरिका और रूस दोनों ही तरफ से समर्थन का दबाव है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव में भारत के रुख का सभी को इंतजार था। भारत मतदान से अनुपस्थित रहा और इसे रूस के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन कहा जा रहा है। आखिर ऐसा क्या है कि रूस को भारत के लिए इतना अहम माना जाता है। दरअसल भारत हथियारों के लिए रूस पर ही सबसे अधिक निर्भर है। हालांकि अमेरिका के साथ भी व्यापार बढ़ रहा है, लेकिन यह रूस की तुलना में काफी कम है:
सबसे अधिक हथियार आपूर्ति करता है रूस
- स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के अनुसार, तीन दशक से भारत को हथियार बेचने में रूस शीर्ष पर है
- हालांकि डाटा यह भी बताता है कि हथियारों के लिए रूस पर भारत की निर्भरता बीते कुछ साल में लगातार कम हो रही है
- इसका अहम कारण है कि बीते करीब 15 साल में भारत ने अन्य देशों का रुख भी हथियार खरीदने के लिए किया है
- भारत ने रक्षा क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए अमेरिका, फ्रांस और इजरायल के साथ हथियार खरीद को बढ़ाया है
कम कीमत और सुलभ तकनीक हस्तांतरण से मजबूत हुई रूस की स्थिति
- नए देशों से हथियार खरीदने की नीति की तरफ बढ़ने के बावजूद रूस अब भारत के लिए सबसे प्रमुख हथियार सप्लायर है
- इसका कारण कम कीमतें, सुलभ तकनीक हस्तांतरण और आपसी समझबूझ है
- विशेषज्ञों के अनुसार यूक्रेन संकट में किस तरफ जाए, यह फैसला करना भारत के लिए खासा कठिन है
- सुरक्षा परिषद में मतदान से अनुपस्थिति का सीधा मतलब रूस का समर्थन नहीं है, लेकिन यह जरूर साफ हो गया है कि अभी भारत अपने पुराने दोस्त के ही साथ है
- हथियार और पड़ोसियों के साथ विवाद की स्थिति में भारत के लिए रूस अधिक महत्व रखता है
- पूर्व में भी कश्मीर व अन्य अहम मुद्दों पर रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत का साथ दिया है
चीन भी है एक बड़ा कारण
- रूस के साथ दोस्ती कायम रखने का एक बड़ा कारण भारत के पड़ोसी चीन और पाकिस्तान भी हैं
- चीन की अधिकारवादी नीतियों से सभी वाकिफ हैं। यूक्रेन मामले में चीन और पाकिस्तान दोनों ही रूस के साथ खड़े दिख रहे हैं
- ऐसे में भारत के लिए मास्को को अपने साथ रखना बहुत जरूरी हो जाता है
- अमेरिका के साथ रिश्तों में रूस निर्मित एस-400 मिसाइल प्रणाली को चीन के खिलाफ रक्षा तंत्र और मजबूत करने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है




