गोरखपुर सदर सीट पर मुस्लिम प्रत्याशियों का नहीं रहा है अच्छा रिकॉर्ड, फिर क्यों मायावती ने योगी के सामने ख़्वाजा शम्सुद्दीन को उतारकर चला दांव, जानिये पूरी रणनीति

गोरखपुर सदर सीट पर मुस्लिम प्रत्याशियों का नहीं रहा है अच्छा रिकॉर्ड, फिर क्यों मायावती ने योगी के सामने ख़्वाजा शम्सुद्दीन को उतारकर चला दांव, जानिये पूरी रणनीति

लखनऊ, तीन दशकों के बाद भाजपा गोरखपुर सदर में किसी भी प्रमुख पार्टी के मुस्लिम उम्मीदवार का सामना करने जा रही है। क्योंकि बसपा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपने पुराने पार्टी कार्यकर्ता ख्वाजा शम्सुद्दीन को इस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पेशे से सरकारी ठेकेदार शम्सुद्दीन 20 साल से भी अधिक समय से बसपा में हैं। मौजूदा समय में वे बसपा के गोरखपुर के मुख्य सेक्टर प्रभारी हैं। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव है।

 ख्वाजा शम्सुद्दीन ने मीडिया से बार करते हुए  कहा कि केवल बसपा ही भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। यहां दोतरफा चुनाव होने जा रहा है क्योंकि स्थानीय लोग समाजवादी पार्टी के खिलाफ हैं। समाजवादी पार्टी यहां से भाजपा की पृष्ठभूमि से आने वाले एक ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। मैं यहां का स्थानीय व्यक्ति हूं।

शम्सुद्दीन ने यह भी कहा कि वह कुछ ब्राह्मण मतदाताओं के अलावा अपने समर्थन के लिए मुस्लिम और दलित वोटों पर उम्मीद लगाए हैं। बसपा पिछले कुछ समय से अपने राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलनों को आयोजित कर ब्राह्मण समुदाय को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।

गोरखपुर सदर सीट पिछले तीन दशकों से भी अधिक समय से भाजपा का गढ़ रही है। 1989, 1991, 1993 और 1996 में भाजपा के शिव प्रताप शुक्ला यहां से जीतते रहे। हालांकि 2002 में वे अखिल भारत हिंदू महासभा के उम्मीदवार राधा मोहन दास अग्रवाल से चुनाव हार गए । उस चुनाव में राधा मोहन दास अग्रवाल को योगी आदित्यनाथ का समर्थन प्राप्त था। राधा मोहन दास अग्रवाल 2002 से ही इस सीट से विधायक हैं।

2017 में गोरखपुर सदर सीट पर 24 उम्मीदवार थे और 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां से 16 उम्मीदवार मैदान में थे। लेकिन एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं था। हालांकि पहले के चुनावों में जब भी कुछ पार्टियों ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे तो किसी को भी 3,000 से ज्यादा वोट नहीं मिले थे। साल 1993 के चुनाव में भी यहां से बसपा ने अपने मुस्लिम उम्मीदवार जाफर अली जिप्पू को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में जिप्पू को 14% वोट मिले थे और वे तीसरे स्थान पर रहे थे।

भाजपा के योगी आदित्यनाथ और बसपा के शम्सुद्दीन के अलावा इस बार आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद भी यहां से चुनाव मैदान में हैं। उन्होंने पिछले महीने कुछ दिनों के लिए गोरखपुर सदर निर्वाचन क्षेत्र का दौरा भी किया था।

बसपा ने शनिवार को पूर्वी उत्तरप्रदेश के 10 जिलों की 54 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। जहां छठे चरण में मतदान होगा। शनिवार को घोषित 54 उम्मीदवारों में से 14 ओबीसी, 11 ब्राह्मण, 11 अनुसूचित जाति और 7 मुस्लिम उम्मीदवार हैं। अंबेडकरनगर जिले की कटेहरी सीट पर बसपा ने सांसद रितेश पांडे के चचेरे भाई प्रतीक पांडे को टिकट दिया है। उनके पिता राकेश पांडे इस चुनाव में जलालपुर से सपा के उम्मीदवार हैं। प्रतीक पांडे के पिता पवन कुमार पांडे अकबरपुर से शिवसेना के पूर्व विधायक रहे हैं। वरिष्ठ बसपा नेता लालजी वर्मा 2017 में कटेहरी से चुनाव जीते थे, लेकिन पिछले साल वे सपा में शामिल हो गए थे। वे इस बार सपा के टिकट पर कटेहरी से चुनाव लड़ रहे हैं।

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