यूपी विधानसभा चुनाव 2022: तीसरे व चौथे चरण के 118 दावेदारों पर भाजपा का मंथन, आज लगेगी प्रत्याशियों पर अंतिम मुहर

यूपी विधानसभा चुनाव 2022: तीसरे व चौथे चरण के 118 दावेदारों पर भाजपा का मंथन, आज लगेगी प्रत्याशियों पर अंतिम मुहर

लखनऊ,उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण की छह सीटें छोड़कर बाकी सभी पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी भारतीय जनता पार्टी का मंथन अब तीसरे और चौथे चरण के प्रत्याशियों के चयन के लिए चल रहा है। दो दिन से दिल्ली में राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश नेतृत्व के साथ चल रही बैठकों में पैनलों में शामिल नामों पर इस लिहाज से भी विचार किया गया है कि इन दो चरणों में कहीं कड़ा मुकाबला हो सकता है तो कहीं भाजपा को अच्छी बढ़त की उम्मीद है। बुधवार को केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशियों के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर शहर और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सिराथू से लड़ाए जाने की घोषणा के अतिरिक्त भाजपा पहले और दूसरे चरण की कुल 113 में से 107 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। बची छह सीटों के अलावा पार्टी ने तीसरे और चौथे चरण की 118 विधानसभा सीटों के प्रत्याशी तय करने के लिए कसरत शुरू कर दी है। सोमवार से ही उत्तर प्रदेश के शीर्ष नेता दिल्ली में जमे हैं।

मंगलवार को सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ हुई। इसके बाद पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में नड्डा के अलावा गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की लंबी बैठक चली। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इन बैठकों में चर्चा पांचवें चरण की 61 सीटों के लिए भी हुई है। हर सीट के पैनल पर वरिष्ठ नेताओं ने विमर्श किया, लेकिन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी प्रस्तावित केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में प्रत्याशी तीसरे और चौथे चरण के लिए ही किए जाएंगे।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में तीसरे और चौथे चरण के चुनाव में भाजपा के लिए कहीं जमीन काफी पक्की मानी जा रही है तो कहीं कुछ कच्ची भी। कानपुर-बुंदेलखंड ऐसा क्षेत्र है, जहां 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने प्रतिद्वंद्वी दलों को करारी पटखनी दी थी। एक तरह से इन क्षेत्रों में विपक्ष का सफाया कर दिया। यहां पार्टी का प्रयास होगा कि कम से कम टिकट काटे जाएं, ताकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी का माहौल बेवजह न बने।

हाथरस, सादाबाद, फर्रुखाबाद किसानों के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं तो लखीमपुर, धौरहरा, पीलीभीत जैसे क्षेत्रों में पार्टी अच्छी रणनीति और मजबूत मोहरों के साथ बिसात बिछाना चाहती है। इसी तरह तीसरे चरण में मुकाबला मैनपुरी, भोगांव, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, इटावा, जसवंतनगर और कन्नौज जैसी सीटें हैं, जो सपा की गढ़ कही जाती हैं। इन क्षेत्रों में जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों में पूरी तरह से मजबूत प्रत्याशी उतारकर भाजपा बढ़त लेना चाहेगी। उम्मीद है कि तीसरे और चौथे चरणों के प्रतयाशियों पर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

गठबंधन की सीटों पर लगभग बनी सहमति : मंगलवार को दिल्ली की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक सहयोगी दलों के नेताओं के साथ भी हुई। अपना दल (एस) को 2017 में भाजपा ने 11 सीटें दी थीं। उनमें से पार्टी आठ जीत सकी। इस बार अपना दल 15 सीटों की उम्मीद लगाए है। वहीं, निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद बार-बार दावा करते हैं कि भाजपा उन्हें 16-17 सीटें देने जा रही है। सूत्रों के अनुसार यदि क्षेत्रीय प्रभाव को देखते हुए सत्ताधरी दलों को अधिक सीटें दे भी देगा तो उनमें से कई सीटों पर अपना दल और निषाद पार्टी के सिंबल पर भाजपा के प्रत्याशी उतारे जा सकते हैं।

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