कोरोना से लड़ाई नहीं पड़ेगी महंगी, अमेरिकी कंपनी Pfizer तैयार कर रही सस्ती दवा

कोरोना से लड़ाई नहीं पड़ेगी महंगी, अमेरिकी कंपनी Pfizer तैयार कर रही सस्ती दवा

वॉशिंगटन: कोरोना (Corona) से लड़ाई में गरीबों को आर्थिक मोर्चे पर परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर (US Pharma Firm Pfizer) कोरोना की सस्ती दवा लाने वाली है. फाइजर ने कहा है कि वो आर्थिक रूप से कमजोर देशों के लिए कोरोना की सस्ती दवा तैयार कर रही है, जिसे भारत को भी दिया जाएगा. कंपनी ने बताया कि इस दवा की लॉन्चिंग में कुछ देरी हुई है, जिसकी वजह से फिलहाल एक अंतरिम उपाय के तौर पर कोविड एंटीवायरल ड्रग पैक्सलोविड (Paxlovid) आर्थिक रूप से कमजोर देशों को पहुंचाई जा रही है.

Pfizer ने नहीं किया है आवेदन

‘इकनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते ही कोविड एंटीवायरल ड्रग मोलनुपिराविर के जेनेरिक वर्जन को भारत में मंजूरी मिली है. इसके पूरे कोर्स के लिए किसी व्यक्ति को करीब 1400 रुपये खर्च करने होंगे, जो अभी के हिसाब से सबसे किफायती कम है. फाइजर ने बुधवार को कहा है कि भारत सहित कई देशों के साथ पैक्सलोविड को लेकर बात चल रही है. कुछ देशों के एडवांस पर्चेस एग्रीमेंट भी हो गया है. हालांकि, अभी तक फाइजर ने भारत में इसके इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी के लिए आवेदन नहीं किया है.

तमाम वेरिएंट्स पर है प्रभावी

ओमिक्रोन की वजह से कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और फाइजर की पैक्सलोविड दवा के तमाम वेरिएंट्स पर प्रभावी होने की बात कही जा रही है. इसे अमेरिका और यूके सहित कई देशों में इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है. संयुक्त राष्ट्र समर्थित मेडिसिंस पेटेंट पूल ने नवंबर में फाइजर के साथ एक लाइसेंस एग्रीमेंट किया था, जिसके तहत कंपनी को पैक्सलोविड के लिए सब-लाइसेंस देने की इजाजत मिली है. यह दवा भारत सहित 95 कम और मध्यम आय वाले देशों को भेजी जाएगी.

…तो दो महीने में हो जाएगी तैयार 

फाइजर के प्रवक्ता ने कहा है कि जिन सस्ती दवाओं पर काम चल रहा है, वो इस साल नहीं आ सकेंगी, इसी के तहत कंपनी कम और मध्य आय वाले देशों के अंतरिम विकल्प के तौर पर सस्ते में यह दवा दे रही है. भारत की जिन दवा निर्माता कंपनियों ने फाइजर की एंटी वायरल दवा के सब-लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, उनके अधिकारियों का कहना है कि दवा बनाने की प्रक्रिया चल रही है. एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अगर सब-लाइसेंस बहुत जल्दी मिल जाता है तो हम सिर्फ दो महीने में ये दवा बनाकर उसके इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी नहीं ले पाएंगे.

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