दुबई में ड्रैगन मार्ट को चुनौती देगा इंडिया मार्ट, यूएई के रास्ते भारत आएंगे कई देशों के उत्पाद

दुबई में ड्रैगन मार्ट को चुनौती देगा इंडिया मार्ट, यूएई के रास्ते भारत आएंगे कई देशों के उत्पाद

नई दिल्ली: दुबई में चीन के ड्रैगन मार्ट को चुनौती देने के लिए इंडिया मार्ट स्थापित करने में हर तरह की सहायता देने को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) तैयार हो गया है। भारत और यूएई के बीच अगले 10 दिनों में कांप्रिहेंसिव इकोनमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (सीपा) का काम पूरा हो जाएगा। नए साल में दोनों सरकारें इस समझौते की औपचारिक घोषणा कर देंगी। भारत सरकार के सहयोग से दुबई में इंडिया मार्ट का निर्माण यूएई करेगा और भारतीय निर्यातकों को इंडिया मार्ट में वेयरहाउस से लेकर आफिस तक शुरू करने में सब्सिडी दी जाएगी।

निर्यातकों को मिलेगी सब्सिडी

यूएई की सरकार भारतीय निर्यातकों को तीन साल के लिए सब्सिडी देगी ताकि भारतीय निर्यातक वहां अपना कारोबार जमा सके। भारतीय निर्यातकों को इसका फायदा यह मिलेगा कि यूएई के माध्यम से वे अफ्रीका के साथ गल्फ कापरेशन से जुड़े सभी देशों के साथ कारोबार कर सकेंगे। गल्फ कापरेशन के सदस्यों में यूएई के अलावा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर व सऊदी अरब शामिल हैं। इनके साथ ही भारतीय निर्यातकों की पहुंच ईरान, इराक और अफगानिस्तान जैसे देशों में भी और मजबूत होगी, जहां भारतीय वस्तुओं की भारी मांग है।

भारत में बढ़ेगा आयात

हालांकि भारत व यूएई के बीच व्यापार समझौता होने के बाद यूएई के रास्ते अन्य देशों के माल भी भारत में खूब आएंगे। सूत्रों के मुताबिक इस पर नियंत्रण के लिए सरकार व्यापार समझौते में वस्तु के मूल उत्पादक देश (कंट्री आफ ओरिजिन) की शर्त लगा सकती है, ताकि यूएई के रास्ते अन्य देशों से होने वाले आयात को नियंत्रित किया जा सके। फेडरेशन आफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के पूर्व अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने बताया कि उनके जैसे निर्यातक दुबई में अपना वेयरहाउस रखेंगे और वहां से सीरिया और मिस्त्र जैसे देशों में भारतीय वस्तुओं को भेज सकेंगे जहां से अभी भारत का कोई निर्यात नहीं है। वह यह भी कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ भारत यूएई के रास्ते अन्य देशों में माल भेज सकेगा, भारत में भी यूएई के रास्ते अन्य देशों के माल आने लगेंगे।

व्यापार की बढ़ोतरी का लक्ष्य

व्यापारिक समझौते के जरिये भारत व यूएई ने दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार को पांच साल में 100 अरब डालर यानी करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। बीते वित्त वर्ष 2020-21 में दोनों देशों के बीच 43 अरब डालर का कारोबार हुआ था।वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों में वस्तुओं के साथ सेवा क्षेत्र के कारोबार में भी बढ़ोतरी होगी। सेवा क्षेत्र के कारोबार को अगले पांच वर्षों में 15 अरब डालर तक ले जाने का लक्ष्य है। भारत अपने निर्यात में तेजी के लिए आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, बांग्लादेश, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, कनाडा जैसे कई देशों के साथ व्यापार समझौते पर काम कर रहा है। अगले साल के अंत तक इन देशों के साथ व्यापारिक समझौते का काम पूरा होने की उम्मीद की जा रही है।

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