शगुन आंखरों से किरसाण महोत्सव का रंगारंग आगाज, पहाड़ की खेती बचाने पर दिया जोर

शगुन आंखरों से किरसाण महोत्सव का रंगारंग आगाज, पहाड़ की खेती बचाने पर दिया जोर

बागेश्वर : गरुड़ तहसील के द्यौनाई में हितैषी संस्था के तत्वावधान में षष्ठ किरसाण महोत्सव का रंगारंग आगाज पारंपरिक शगुन आंखरों के साथ हो गया है। महोत्सव का शुभारंभ समाजसेवी भैरव नाथ टम्टा ने दीप प्रज्वलित कर किया।उन्होंने कहा कि पहाड़ की खेती बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।इस मौके महिलाओं से खेतीबाड़ी व पशुपालन पर विस्तृत चर्चा की गई।

हितैषी विद्या निकेतन द्यौनाई में आयोजित तीन दिवसीय किरसाण महोत्सव के प्रथम दिन महोत्सव का शुभारंभ करते हुए समाजसेवी भैरव नाथ टम्टा  ने कहा कि पहाड़ में खेती व पशुपालन ही आर्थिकी का एकमात्र जरिया है। उन्होंने कहा कि खेती व पशुपालन को रोजगार से जोड़ना होगा, तभी पहाड़ से पलायन रुकेगा।इस मौके पर महिलाओं ने बंदरों व सुअरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस उपाय खोजने को कहा।संस्था के सचिव डॉ किशन राणा ने किरसाण महोत्सव के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला। इस मौके पर महिलाओं ने पारंपरिक शगुन आखर गाए।

लखनी गांव की लोक गायिका कमला देवी ने लोकगीत गाकर लोगों की वाहवाही लूटी। सांस्कृतिक टीम ने पहाड़ की महिलाओं पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।हितैषी विद्या निकेतन के बच्चों ने वंदना, स्वागत गीत व रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए।इस दौरान प्रो आनंद जीना, प्रो कमान सिंह कठायत, जिपंस भावना दोसाद, बबलू नेगी, चंद्रशेखर पांडे, मोहन बोरा, राजीव कांडपाल, भुवन कैड़ा, मंजू बोरा आदि मौजूद थे।

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