Uttar Pradesh Election 2022: उत्तर प्रदेश में आगामी विधासभा के चुनावी समर में अजित सिंह, कल्याण सिंह, लालजी टंडन जैसे कई सियासी दिग्गज इस बार नजर नहीं आएंगे. कई बड़े नेताओं की मौत हो चुकी है, तो कई के सामने गिरती सेहत की लाचारी है तो कुछ संवैधानिक पदों पर होने की वजह से सीयासी अखाड़े से दूर रहेंगे. कई नेता जेल में होने की वजह से भी चुनावों से दूर होंगे.

पश्चिम के छोटे चौधरी के बिना होंगे इस बार विधानसभा चुनाव- राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया रहे चौधरी अजीत सिंह पश्चिम यूपी की सियासत में बड़ा नाम थे. छोटे चौधरी के नाम से पश्चिम यूपी में चर्चित रहे अजित सिंह वर्ष 1989 से 2014 तक लगातार केंद्र में मंत्री रहे. पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह भारत के कृषि मंत्री और नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके थे. पश्चिम यूपी की सियासत के केंद्र में अजित सिंह दो दशक से ज्यादा रहे हैं. 6 मई 2021 को अजित सिंह की मृत्यु हो गई. अब अजित सिंह की गैरमौजूदगी में उनके बेटे जयंत चौधरी के जिम्मे अपनी पार्टी की बागडोर है.

कल्याण सिंह की कड़क आवाज नहीं देगी सुनाई- यूपी में पिछड़ों के बड़े नेता के रूप में कल्याण सिंह की पहचान थी. यूपी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान विवादित बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हिंदुत्व के बड़े ब्रांड बनकर उभरे. कल्याण सिंह दो बार मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रह चुके थे. कल्याण सिंह की 21 अगस्त 2021 को मौत हो गई.

40 वर्षों में पहली बार जब टंडन को नहीं सुन सकेंगे लोग- लालजी टंडन बीजेपी के संस्थापक सदस्य रहे. 85 साल की उम्र में 21 जुलाई 2020 को उनका निधन हो गया. 40 वर्षों से लगातार लालजी टंडन हर चुनाव में सक्रिय रहे. इस बार के विधानसभा चुनाव पार्टी को उनकी कमी काफी खलेगी.

मुलायम सिंह अस्वस्थता की वजह से ज्यादा सक्रिय नहीं रहेंगे – जहां भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व चुनावी रैलियां कर रहा है. वहीं यूपी में मुख्य विपक्षी दल के संस्थापक और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव बढ़ती उम्र और अस्वस्थता की वजह से चुनावी मैदान में नज़र नहीं आ रहे हैं.

जेल में होने की वजह से विधानसभा चुनावों की सियासत से दूर रहेंगे आजम और अतीक- सपा के कद्दावर नेता हर चुनाव में पार्टी के लिए मुस्लिम वोटरों की गोलबंदी करते नज़र आते रहे, लेकिन इस बार पहला मौका होगा जब आजम खा जेल में होने की वजह से चुनावी समर मे नज़र नहीं आएंगे. बता दें कि आजम खां सीतापुर जेल में बंद हैं, वहीं अतीक अहमद पिछले चुनावों में लगातार सक्रिय रहे इस बार जेल में हैं.

संवैधानिक पद पर होने की वजह से चुनावी समर से दूरी कलराज मिश्र और रामनाथ कोविंद संवैधानिक पदों पर होने की वजह से चुनावों से दूर हैं. जहां कलराज मिश्र यूपी में भाजपा के दिग्गज नेता माने जाते रहे, वहीं रामनाथ कोविंद की कानपुर और आसपास के क्षेत्र में सक्रियता रहती थी.

अमर सिंह और चेतन चौहान जैसे दिग्गजों की भी कमी खलेगी- अमर सिंह के सियासी जोड़-तोड़ और बयानों के चर्चे हर चुनावों में रहे. 1 अगस्त 2020 को अमर सिंह की मौत के बाद ये पहला चुनाव होगा, जिसमें वह नहीं होंगे. चेतन चौहान और कमला रानी वरुण की भी मौत हो चुकी है. यह दोनों योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हैं. कमला रानी वरुण कानपुर और आसपास के जिलों में प्रभाव रखती थीं, वहीं चेतन चौहान की सियसी जमीन अमरोहा और आसपास के जिलों में मजबूत मानी जाती रही है.




