
नई दिल्ली, 11 नवंबर 2021
चारधाम हाईवे परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. चीन सीमा से जुड़े इस राजमार्ग को लेकर दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है, जिस पर विस्तार से बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है. इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार दोनों के तर्कों को सुना और अहम टिप्पणियां कीं. फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों से दो दिनों में लिखित सुझाव मांगा है और उसके बाद कोर्ट तय करेगा कि करीब 900 किलोमीटर लंबे इस ऑल वेदर हाईवे प्रोजेक्ट में सड़कों को और चौड़ाई किया जा सकता है या नहीं.
कोर्ट 8 सितंबर 2020 के उस आदेश में संशोधन के लिए केंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को परियोजना से जुड़े राजमार्ग पर 5.5 मीटर का गलियारा बनाने का नियम पालन करने को कहा गया था. चारधाम परियोजना का उद्देश्य सभी मौसम में पहाड़ी राज्य के चार पवित्र स्थलों यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ना है. इस परियोजना के पूरे हो जाने के बाद हर मौसम में चार धाम की यात्रा की जा सकेगी.
पर्यावरण बनाम देश की सुरक्षा की इस बहस में सुप्रीम कोर्ट में किस पक्ष ने किस तरह अपने तर्क रखे थे. इन तमाम बातों को सुनने के बाद कोर्ट ने साफ तौर पर कहा था कि पर्यावरण से जुड़ी ज़रूरतों और देश के रक्षा मामलों से जुड़ी अनिवार्यताओं के बीच एक समन्वय बनाए जाने की ज़रूरत है.
इस मामले से जुड़े खास फैक्ट्स
– इस परियोजना के तहत 900 किलोमीटर लम्बी सड़क परियोजना का निर्माण हो रहा है.
– अभी तक 400 किमी सड़क का चौड़ीकरण किया जा चुका है.
– एक अनुमान के मुताबिक, अभी तक 25 हजार पेड़ों की कटाई हो चुकी है, जिससे पर्यावरणविद नाराज हैं.
– गैर सरकारी संगठन ‘Citizens for Green Doon’ ने एनजीटी के 26 सितंबर 2018 के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.
– एनजीटी ने व्यापक जनहित को देखते हुए इस परियोजना को मंजूरी दी थी.
– एनजीओ का दावा था कि इस परियोजना से इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी को होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी.







