नई दिल्ली, दिल्ली विधानसभा में आज, 25 फरवरी 2025 को, नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की 14 लंबित रिपोर्टें पेश की गईं, जो 2017 से 2022 तक की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कार्यकाल से संबंधित हैं। इन रिपोर्टों में दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों और नीतियों की वित्तीय और प्रदर्शन जांच शामिल है।
14 CAG रिपोर्टों का विवरण:
राज्य वित्त ऑडिट रिपोर्ट: दिल्ली सरकार की आय, व्यय, और राजस्व स्थिति की जांच।
वाहन प्रदूषण ऑडिट रिपोर्ट: दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने के उपायों पर हुए खर्च की समीक्षा।
शराब नीति और आपूर्ति पर ऑडिट: अब रद्द हो चुकी शराब नीति से 2,026 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा, लाइसेंस देने में अनियमितताएं और कथित लाभ पहुंचाने के आरोप।
शीश महल (मुख्यमंत्री आवास नवीकरण): पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के नवीकरण पर 33.66 करोड़ रुपये खर्च, जो मूल बजट से 342% अधिक था।
सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा और सेवाएं: मोहल्ला क्लीनिक और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में फंड के उपयोग और खर्च की समीक्षा।
दिल्ली परिवहन निगम (DTC) का कामकाज: DTC के वित्तीय घाटे, बस की खरीद और परिचालन दक्षता की समीक्षा।
वित्तीय और विनियोग खाते: दिल्ली सरकार के नियंत्रक लेखा द्वारा तैयार, बजट उपयोग की वैधानिकता और सटीकता की जांच।
शिक्षा विभाग की ऑडिट रिपोर्ट: स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की भर्ती और शिक्षा योजनाओं में बजट उपयोग की समीक्षा।
सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं: मुफ्त बिजली, पानी सब्सिडी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता और वित्तीय प्रबंधन की जांच।
आर्थिक क्षेत्र की परियोजनाएं: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में खर्च और कार्यान्वयन की समीक्षा।
सार्वजनिक उपक्रमों की ऑडिट: दिल्ली सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों या संस्थाओं की वित्तीय स्थिति और प्रदर्शन की जांच।
सामान्य क्षेत्र की ऑडिट: प्रशासनिक खर्च और अन्य सामान्य गतिविधियों की समीक्षा।
पर्यावरण और अन्य प्रदर्शन ऑडिट: प्रदूषण के अलावा अन्य क्षेत्रों में सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन की समीक्षा।
वित्तीय और विनियोग खाते (2021-22 और 2022-23): दिल्ली सरकार के नियंत्रक लेखा द्वारा तैयार वित्तीय दस्तावेजों की जांच।
इन रिपोर्टों के पेश होने से विधानसभा में तीव्र बहस छिड़ गई, जिसमें AAP विधायकों ने जोरदार विरोध किया। कई AAP विधायकों को सदन से निलंबित भी किया गया। भाजपा नेताओं का दावा है कि ये रिपोर्टें “AAP के भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा” खोलेंगी, जबकि AAP का कहना है कि ये राजनीतिक हमला है और रिपोर्टें पहले ही केंद्र के पास थीं।
CAG, या नियंत्रक और महालेखा परीक्षक, एक संवैधानिक संस्था है जो केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्राप्तियों और व्यय की जांच करती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन का उपयोग पारदर्शी और वैधानिक तरीके से हो।
दिल्ली में इन रिपोर्टों के पेश होने से AAP पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर शराब नीति और शीश महल जैसे मुद्दों को लेकर। भाजपा ने इन मुद्दों पर पहले से ही AAP की आलोचना की है, और इन रिपोर्टों के माध्यम से वे अपने आरोपों को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन रिपोर्टों के निष्कर्षों पर विधानसभा में कैसी चर्चा होती है और क्या ये दिल्ली की राजनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव डालती हैं।




