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बरेली, 29 अगस्त 2021

बरेली के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने तब्लीगी जमात के 12 सदस्यों को अब सभी आरोपों से बरी कर दिया है। पंद्रह महीने पहले, उन्हें कोविड मानदंडों की ‘लापरवाही’ और ‘अवज्ञा’ के आरोप में जेल भेजा गया था।

बरी किए गए लोगों में नौ थाई नागरिक, उनके दो अनुवादक और शाहजहांपुर में मस्जिद का एक कार्यवाहक है, जहां वे दिल्ली में जमात मण्डली में भाग लेने के बाद रह रहे थे।

थाई नागरिकों को उनके घर लौटने की अनुमति दे दी गई है।

जमात सदस्यों के वकील मिलन गुप्ता ने कहा कि शनिवार को मौखिक रूप से आदेश पारित किया गया। बरी होने पर फैसले की प्रति तुरंत नहीं दी जाती है। हमने इसके लिए आवेदन किया है और यह मंगलवार को अदालत खुलने के बाद उपलब्ध होनी चाहिए।

पिछले साल मार्च की शुरूआत में तब्लीगी जमात के निजामुद्दीन मरकज (केंद्र) में हजारों लोग जमा हुए थे।

केंद्र ने बाद में कहा कि इस आयोजन में 2,300 विदेशी नागरिकों ने भाग लिया था। जमात की बैठक 15 मार्च, 2020 तक समाप्त हो गई, जिसके बाद केंद्र ने तालाबंदी की घोषणा की।

विदेशी नागरिक देश छोड़कर नहीं जा सके और वहीं रहे।

उनमें से नौ थाई नागरिक थे, जो शाहजहांपुर गए और अपने दो अनुवादकों हुसैन अहमद और अब्दुल सरदार एम.एस. (दोनों तमिलनाडु से थे)।

उन्हें, मस्जिद के कार्यवाहक मासिउल्लाह के साथ, 1 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था।

थाई नागरिकों पर भी अलग से विदेशी अधिनियम (वीजा नियमों का उल्लंघन) की धारा 14 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जब वे जेल में थे, उनका मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चला गया, जिसनें नवंबर में उन्हें जमानत दे दी। हालांकि, आरोपों को हटाया नहीं गया था, नौ थाई नागरिकों के पासपोर्ट पुलिस के पास थे और वे देश नहीं छोड़ सकते थे और मस्जिद में रखा गया था।