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राजनीति छोड़ने की कगार से 10वीं बार मुख्यमंत्री तक,कैसे नीतीश बने बिहार की राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी

राजनीति छोड़ने की कगार से 10वीं बार मुख्यमंत्री तक,कैसे नीतीश बने बिहार की राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी

बिहार की राजनीति में मज़बूत पकड़ रखने वाले नीतीश कुमार एक बार फिर इतिहास रचने जा रहे हैं। वह गांधी मैदान में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक सफर के बारे में—कैसे शुरुआत हुई, पहली जीत कब मिली और किस मोड़ पर लगभग उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला कर लिया था।

राजनीति में शुरुआत और बड़ी चुनौती

नीतीश कुमार ने राजनीति में कदम 1977 में रखा, जब उन्होंने पहली बार हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 1980 में फिर उसी सीट से प्रयास किया, लेकिन नतीजा वही रहा हार। इसके बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल था कि क्या राजनीति में आगे बढ़ना है या नहीं। कहा जाता है कि उन्होंने तय कर लिया था कि अगर 1985 का चुनाव भी हार गए, तो राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन किस्मत बदल गई—इस बार वह हरनौत से जीतकर पहली बार विधायक बने।

राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री

1989 के बाद नीतीश ने बाढ़ लोकसभा सीट जीती और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान बननी शुरू हुई। 1990 में वी. पी. सिंह की सरकार में उन्हें केंद्रीय कृषि एवं सहकारिता राज्य मंत्री बनाया गया। 1994 में उन्होंने लालू प्रसाद यादव से रास्ते अलग किए और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई। फिर 1996 में उनकी पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया और बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया।

पहली बार मुख्यमंत्री बने लेकिन सिर्फ 7 दिन

नीतीश कुमार पहली बार वर्ष 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन यह कार्यकाल सिर्फ 7 दिन का रहा।
फिर 24 नवंबर 2005 में वह दोबारा मुख्यमंत्री बने और इस बार अपना कार्यकाल पूरा किया। 2013 में उन्होंने बीजेपी से 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद 2014 में उन्होंने इस्तीफा भी दे दिया।

गठबंधनों का बदलता सफर और कई बार शपथ

2015 में नीतीश फिर लौटे—इस बार महागठबंधन के साथ और वह चौथी बार मुख्यमंत्री बने।
उसी साल नवंबर में उन्होंने 5वीं बार शपथ ली, लेकिन 2017 में राजनीतिक घटनाक्रम बदल गया और उन्होंने इस्तीफ़ा देकर महागठबंधन से दूरी बना ली। उसी दिन वह एनडीए में लौटे और 6वीं बार मुख्यमंत्री बने।

2020 में एनडीए की जीत के साथ वह 7वीं बार CM बने।
9 अगस्त 2022 को उन्होंने फिर बीजेपी छोड़ दी और महागठबंधन में शामिल होकर 8वीं बार शपथ ली।
इसके बाद 28 जनवरी 2024 को उन्होंने दोबारा बीजेपी से हाथ मिला लिया।
2025 में एनडीए की जीत के बाद वह अब 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

नीतीश कुमार का निजी जीवन और शिक्षा

नीतीश कुमार का जन्म 1 मार्च 1951 को पटना जिले के बख्तियारपुर में हुआ था।
उनके पिता कविराज रामलखन सिंह स्वतंत्रता सेनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। उनकी माता का नाम परमेश्वरी देवी था। उन्होंने 1972 में बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पटना से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय बिजली विभाग में नौकरी भी की। 22 फरवरी 1973 को उनकी शादी मंजू कुमारी सिन्हा से हुई। उनका एक पुत्र है—निशांत कुमार।

JDU की शुरुआत

1994 में बनी समता पार्टी का 2004 में विलय हुआ और वहीं से जनता दल यूनाइटेड (JDU) की शुरुआत हुई, जिसने आगे आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति की दिशा बदल दी।नीतीश कुमार का यह राजनीतिक सफर यह बताता है कि हार, गठबंधन बदलाव और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी पहचान और पकड़ मजबूत बनाई। अब उनका नाम बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शुमार हो चुका है।

 

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