मणिपुर में क्या बदला? राष्ट्रपति शासन क्यों हटा और युमनाम खेमचंद कैसे बने मुख्यमंत्री

मणिपुर में क्या बदला? राष्ट्रपति शासन क्यों हटा और युमनाम खेमचंद कैसे बने मुख्यमंत्री

मणिपुर में लंबे समय बाद राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य से राष्ट्रपति शासन हटा लिया है और युमनाम खेमचंद ने नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। लेकिन यह फैसला क्यों लिया गया, खेमचंद कौन हैं और आगे की राह कितनी चुनौतीपूर्ण है—आसान सवाल-जवाब में समझते हैं।


मणिपुर से राष्ट्रपति शासन क्यों हटाया गया?

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के जरिए मणिपुर में लागू राष्ट्रपति शासन को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। केंद्र का मानना है कि राज्य में सरकार गठन की स्थिति बन गई है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत निर्वाचित सरकार को मौका दिया जाना चाहिए।


नए मुख्यमंत्री कौन बने हैं?

मणिपुर के नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद बने हैं। राज्यपाल अजय भल्ला ने उन्हें लोकभवन में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।


युमनाम खेमचंद कौन हैं?

62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मेतई समुदाय से आते हैं और सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं। पेशे से इंजीनियर रहे खेमचंद इससे पहले बीरेन सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग के मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2022 में भी वे मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे और उन्हें संघ परिवार के करीबी नेताओं में गिना जाता है।


मुख्यमंत्री का चयन कैसे हुआ?

बीजेपी मुख्यालय में हुई विधायक दल की बैठक में खेमचंद को नेता चुना गया। इस प्रक्रिया के लिए पार्टी आलाकमान ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह के नाम भी चर्चा में थे। गोविंद दास को पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का समर्थन प्राप्त था।


पहले इंफाल में बैठक क्यों नहीं हुई?

विधायक दल की बैठक पहले इंफाल में प्रस्तावित थी, लेकिन कुकी समुदाय से जुड़े विधायकों ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की इच्छा जताई। इसी कारण राजनीतिक गतिविधियां कुछ समय के लिए दिल्ली में केंद्रित रहीं।


राष्ट्रपति शासन क्यों लगाया गया था?

मई 2023 में मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा के बाद हालात बिगड़ गए थे। हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों लोग विस्थापित हुए। हालात काबू में न आने पर 13 फरवरी 2025 को राज्य में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया, जिसे अगस्त 2025 में आगे बढ़ाया गया।


विधानसभा में किसके पास कितनी ताकत है?

60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी के 37 विधायक हैं। एनडीए के सहयोगी दलों में एनपीपी के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट के 5 विधायक शामिल हैं। संख्याबल के लिहाज से सरकार को बहुमत का समर्थन हासिल है।


आगे की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भरोसा बहाल करना, विस्थापितों की पुनर्वापसी और राज्य में स्थायी शांति स्थापित करना होगी। राष्ट्रपति शासन हटने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि निर्वाचित सरकार हालात को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का हटना संवैधानिक प्रक्रिया की वापसी है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू हुई है—जमीन पर शांति और भरोसा बहाल करने की।

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