Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel bahsegel giriş bahsegel bettiltguncel.com bettilturk-turk.click bettilt bettilt bahsegel bahsegel bettilt bahsegel giriş

बिहार में SIR को लेकर सियासी संग्राम, विपक्ष का चक्का जाम आंदोलन

बिहार में SIR को लेकर सियासी संग्राम, विपक्ष का चक्का जाम आंदोलन

पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान, जिसे SIR (Special Intensive Revision) कहा जा रहा है, को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। मंगलवार को राज्यभर में महागठबंधन ने चक्का जाम कर दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पटना सहित कई जिलों में प्रदर्शन हुए।

पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, आरा, समस्तीपुर, हाजीपुर और जहानाबाद समेत दर्जनों ज़िलों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर टायर जलाए, नारेबाज़ी की और यातायात पूरी तरह से बाधित कर दिया। कई जगहों पर ट्रेनें भी रोकी गईं, जिससे यात्री परेशान रहे।

विरोध का कारण क्या है?

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई यह SIR प्रक्रिया संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस अभियान के ज़रिए गरीब, दलित, महादलित, आदिवासी और प्रवासी मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं।

कांग्रेस ने इसे “मतदाता अधिकारों का हनन” बताया है, वहीं तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि “2025 विधानसभा चुनाव से पहले वोटरों की साफ-सफाई के नाम पर साज़िश रची जा रही है।“

प्रशासन और पुलिस सतर्क

राज्य के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। कुछ जगहों पर हल्की झड़पें भी देखने को मिलीं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति नियंत्रण में रही।

प्रशासन की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। वहीं कई जगहों पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप रही, जिससे आम जनता को भारी परेशानी हुई।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से संवैधानिक प्रावधानों के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना है, न कि किसी विशेष वर्ग को बाहर करना।

वहीं दिलचस्प बात यह है कि जिन दलों ने SIR प्रक्रिया का विरोध किया है, उन्होंने ही अपने 56,000 से ज्यादा BLA (Booth Level Agents) नियुक्त किए हैं ताकि मतदाता सूची को ठीक से जांचा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में SIR प्रक्रिया को “ग़ैर-कानूनी और पक्षपातपूर्ण” करार देते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।

बिहार में SIR को लेकर जो टकराव सामने आया है, वह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा बनता जा रहा है। विपक्ष इसे मतदाता अधिकारों से जोड़कर बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा है। अब देखना यह होगा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या रुख अपनाते हैं और सरकार इस गतिरोध को कैसे सुलझाती है।

Share post:

Popular

More like this
Related

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश बनेगा ‘ग्लोबल मैनपावर हब’

सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास...

प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर सवाल: एक बेटे की मौत, दूसरा कहां है?

Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के...

ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, अभिजीत दिपके के साथ कौन-कौन से दल?

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे...