पैसे नहीं, पैशन की जीत: नेपाल क्रिकेट टीम की संघर्ष भरी कहानी

2026 टी20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीम को पसीना छुड़ाने वाली नेपाल क्रिकेट टीम ने भले मैच न जीता हो, लेकिन दिल जरूर जीत लिया. मैदान पर बराबरी की टक्कर देने वाली यह टीम असल ज़िंदगी में कितनी मुश्किल हालात में खेलती है, यह जानकर हैरानी होती है.

नेपाल के एक क्रिकेटर को एक टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने के लिए सिर्फ 5,000 नेपाली रुपये, यानी करीब 3,500 भारतीय रुपये मिलते हैं. ODI मैच में यह रकम करीब 7,000 रुपये तक पहुंचती है. नेपाल क्रिकेट बोर्ड के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में भी हालात बेहतर नहीं हैं. टॉप ग्रेड के खिलाड़ियों को साल भर में सिर्फ 60–65 हजार रुपये मिलते हैं, यानी महीने का खर्च भी ठीक से नहीं निकलता.

अब ज़रा तुलना कीजिए. इंग्लैंड का एक खिलाड़ी एक टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने के लिए करीब 3,500 पाउंड, यानी लगभग 4.5 लाख रुपये लेता है. भारत में हालात और भी अलग हैं. भारतीय खिलाड़ी को एक T20 मैच के लिए 3 लाख रुपये, ODI के लिए 6 लाख और टेस्ट के लिए 15 लाख रुपये मिलते हैं. इसके ऊपर BCCI का सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट, जिसमें टॉप ग्रेड खिलाड़ियों की सालाना कमाई 7 करोड़ रुपये तक होती है. आईपीएल तो अलग ही दुनिया है, जहां एक सीजन में खिलाड़ी 10–20 करोड़ रुपये कमा लेते हैं.

यही वजह है कि नेपाल की टीम जब वानखेड़े में इंग्लैंड से भिड़ी, तो लोग सिर्फ क्रिकेट नहीं देख रहे थे, बल्कि जज़्बे की कहानी देख रहे थे. कम पैसों, कम सुविधाओं और सीमित संसाधनों के बावजूद नेपाल के खिलाड़ी दुनिया की बड़ी टीमों को आंखों में आंखें डालकर चुनौती दे रहे हैं. शायद इसी जज़्बे को देखकर साउथ अफ्रीका के दिग्गज गेंदबाज़ डेल स्टेन तक कह चुके हैं कि वे नेपाल टीम को कोचिंग देना चाहेंगे.

यह फर्क बताता है कि क्रिकेट सिर्फ पैसे का खेल नहीं, बल्कि जुनून और सपने का भी खेल है—और नेपाल के खिलाड़ी इस बात की सबसे बड़ी मिसाल बन चुके हैं

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