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पप्पू यादव की गिरफ्तारी: क्या है 35 साल पुराना मामला, क्यों आधी रात पहुंची पुलिस जानिए पूरा मामला

पप्पू यादव की गिरफ्तारी: क्या है 35 साल पुराना मामला, क्यों आधी रात पहुंची पुलिस जानिए पूरा मामला

बिहार की राजनीति में शुक्रवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी केवल एक कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ घंटों चला ड्रामा, समर्थकों का हंगामा और कार्रवाई के समय व तरीके को लेकर कई सवाल भी खड़े हो गए। मामला 35 साल पुराना बताया जा रहा है, जबकि गिरफ्तारी के बाद सांसद की तबीयत अचानक बिगड़ने से स्थिति और संवेदनशील हो गई।

पटना में आधी रात क्या हुआ?

शुक्रवार देर रात करीब 12 बजे पटना सिटी के मंदिर इलाके में स्थित सांसद के आवास पर पुलिस टीम पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही समर्थकों की भीड़ जुटने लगी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस और समर्थकों के बीच पहले बहस हुई, जो बाद में नोकझोंक और नारेबाजी में बदल गई। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को सांसद को लेकर निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। समर्थकों का आरोप था कि बिना किसी पूर्व सूचना और देर रात इस तरह की कार्रवाई अनुचित है।

किस मामले में हुई गिरफ्तारी?

पुलिस के मुताबिक, पप्पू यादव की 35 साल पुराने एक मामले में जमानत रद्द हो चुकी है। इसी के बाद अदालत के आदेश पर उनकी गिरफ्तारी की गई। बताया जा रहा है कि इस मामले में कुछ दिन पहले कुर्की-जब्ती का आदेश भी जारी किया गया था। पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह कदम उठाया गया, जबकि सांसद पक्ष इसे अचानक और मनमाना बता रहा है।

वारंट को लेकर क्यों उठा विवाद?

गिरफ्तारी के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस अधिकारियों से पूछा कि वारंट कहां है। उनका आरोप है कि न तो उन्हें कोई समन दिया गया और न ही कोई लिखित आदेश दिखाया गया। सांसद का कहना है कि जब लोकसभा सत्र चल रहा था और वे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे, तो कार्रवाई दिन में भी की जा सकती थी। देर रात की कार्रवाई को उन्होंने संदेहास्पद बताया।

पुलिस का पक्ष क्या है?

पटना सिटी एसपी भानु प्रताप खुद मौके पर मौजूद थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे अदालत के आदेश का पालन करने पहुंचे थे और किसी तरह की गैरकानूनी या जल्दबाजी वाली कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस का दावा है कि पप्पू यादव स्वयं साथ जाने की बात कह रहे थे, लेकिन समर्थकों के विरोध और बहस के कारण स्थिति बिगड़ गई और कार्रवाई में देरी हुई।

गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत

गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें पहले पटना के IGIMS अस्पताल में मेडिकल जांच और इलाज के लिए लाया गया। इलाज के दौरान स्वास्थ्य में और गिरावट आने पर डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें PMCH शिफ्ट किया गया। फिलहाल डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है। इस बीच समर्थकों और परिजनों में चिंता का माहौल है और बेहतर इलाज की मांग की जा रही है।

1995 का मामला क्या है?

मामला वर्ष 1995 से जुड़ा है। पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने धोखाधड़ी कर उनका मकान किराए पर लिया और बाद में उस मकान का इस्तेमाल सांसद कार्यालय के रूप में किया गया। आरोप है कि किराए पर लेते समय मकान के वास्तविक उपयोग की जानकारी छिपाई गई थी।

अदालत का आदेश और मौजूदा स्थिति

इस मामले में हाल ही में पटना की एमपी-एमएलए अदालत ने पप्पू यादव समेत तीन लोगों के खिलाफ कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया था। यह आदेश लंबे समय तक अदालत में पेश न होने के कारण दिया गया था। इससे पहले कोर्ट की ओर से गिरफ्तारी वारंट और इश्तेहार भी जारी किए जा चुके थे। अब गिरफ्तारी और बिगड़ती सेहत के बीच पप्पू यादव का इलाज अस्पताल में जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत में तय होगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला न सिर्फ कानूनी, बल्कि सियासी रूप से भी अहम है, जिसका असर आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।

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