पंजाब के बाद अब हरियाणा कांग्रेस के चेहरे-मोहरे में भी जल्द बदलाव संभव, राजनीतिक अटकलें तेज

पंजाब के बाद अब हरियाणा कांग्रेस के चेहरे-मोहरे में भी जल्द बदलाव संभव, राजनीतिक अटकलें तेज

चंडीगढ़,  पंजाब कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिलने के बाद हरियाणा कांग्रेस के मोहरे-चेहरे में भी बदलाव जल्द ही संभव है। प्रदेश में हालांकि संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जिस तरह से पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर विधायक राजा वडिंग की नियुक्ति की गई है, उसे देखकर लग रहा है कि हरियाणा में भी नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान किसी भी समय हो सकता है।

चर्चा है कि राजस्थान व हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष के पदों पर एकसाथ जल्द नियुक्तियां संभव हैं। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बदलाव की अटकलें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी सैलजा के अलग-अलग बयानों से भी तेज हुई हैं।

हुड्डा ने तीन दिन पहले एक प्रेस कान्फ्रेंस में कहा था कि अध्यक्ष पद के लिए न तो मैं दावेदार हूं और न ही मेरा सांसद बेटा दीपेंद्र दावेदार है, लेकिन यदि विधायक व पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि बदलाव होना चाहिए तो हाईकमान इस बारे में तय करेगा।

कुमारी सैलजा ने इसका जवाब यह कहते हुए दिया था कि उन्हें कुर्सी से कोई लगाव नहीं है। वह जन्मजात कांग्रेसी हैं, कांग्रेसी थी और कांग्रेसी ही रहेंगी। हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बदलाव की अटकलें लंबे समय से चल रही हैं। राज्य में पिछले आठ साल से कांग्रेस का संगठन नहीं है।

हुड्डा खेमे का कहना है कि संगठन के अभाव में कार्यकर्ता काम नहीं कर पा रहे हैं, जबकि सैलजा की दलील है कि संगठन बनाने की प्रक्रिया चल रही है और हमारे पास ऐसे तमाम कार्यकर्ताओं की फौज है, जो बिना संगठन के भी लोगों के बीच जाकर धरातल पर काम कर रहे हैं। हरियाणा में कांग्रेस के 31 विधायक हैं, जिनमें से 26-27 विधायक हुड्डा के साथ और चार-पांच विधायक सैलजा के साथ हरदम नजर आते हैं।

कांग्रेस के अध्यक्ष पद से अशोक तंवर के हटने के बाद जब सैलजा को कमान सौंपी गई, तब हुड्डा और सैलजा के राजनीतिक रिश्ते बहुत बढ़िया था। मीडिया में अभी भी दोनों अपने रिश्तों को लेकर कोई विपरीत टिप्पणी नहीं करते, लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के दौरान हुड्डा और सैलजा के बीच अनबन शुरू हो गई थी।

सैलजा ने हुड्डा की सिफारिश वाले आधा दर्जन दावेदारों को टिकट नहीं लेने दिए थे, जिस पर हुड्डा दावा करते हैं कि यदि उन्हें टिकट मिल गई होती तो वह जीतते और राज्य में कांग्रेस की सरकार बनती।

हरियाणा में 2024 में पहले लोकसभा और उसके बाद विधानसभा चुनाव होंगे। राज्य में फिलहाल पार्टी का सदस्यता अभियान चल रहा है, जो 15 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। सदस्यता अभियान के दौरान भी हुड्डा व सैलजा समर्थकों की खींचतान सामने आई है।

नियम के अनुसार जुलाई-अगस्त में प्रदेश अध्यक्ष का चयन संभव है, लेकिन जिस तरह संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया के बीच पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष व कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है, उसे देखकर लग रहा है कि हरियाणा में भी चुनाव की औपचारिकता से पहले संगठन में बदलाव संभव है।

पार्टी राज्य में एक कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त कर सकती है। फिलहाल दलित को अध्यक्ष और ब्राह्मण को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है। हुड्डा खेमे के इस गणित को पलटने के लिए उनके विरोधी भी गेम लड़ाने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं।

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