भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की रक्षा करेगा यह मिसाइल, फाइटर प्लेन हो या ड्रोन हर टारगेट को करेगा तबाह

नई दिल्ली। डीआरडीओ (Defence Research and Development Organisation) ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की रक्षा के लिए एक ऐसा मिसाइल बनाया है जो फाइटर प्लेन और मिसाइलों से उसकी रक्षा करेगा। इसका नाम VL-SRSAM (Vertical Launch Short Range Surface to Air Missile) है। यह कम दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल है। शुक्रवार को इसका सफल टेस्ट किया गया। इस मिसाइल को हमला करने आ रहे लड़ाकू विमान, मिसाइल, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और अन्य हवाई टारगेट को नष्ट करने के लिए बनाया गया है। यह 40-50 किलोमीटर की दूरी और 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक हमला कर सकता है। इसे हवा से हवा में लंबी दूरी तक मार करने वाले अस्त्र मिसाइल के आधार पर बनाया गया है।

युद्धपोतों की सुरक्षा होगी मजबूत
मिसाइल को वर्टिकल लॉन्च ट्यूब से फायर किया जा सकता है। यह सिस्टम युद्धपोत के लिए जरूरी होता है। यह हर तरह के मौसम में काम करता है। इसके नौसेना में शामिल होने से युद्धपोतों की सुरक्षा और अधिक मजबूत हो जाएगी। वर्तमान में भारतीय नौ सेना हवाई हमले से निपटने के लिए बराक 8 जैसे मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करती है। इसे इजराइल की कंपनी ने बनाया है। इसका रेंज 70 किलोमीटर है।

5,367 किलोमीटर प्रतिघंटा है रफ्तार
युद्धपोत को हवाई हमले से बचाने के लिए तैनात होने वाले मिसाइल को फाइटर प्लेन और मिसाइलों को हवा में नष्ट करना होता है। इसके लिए मिसाइल की रफ्तार काफी मायने रखती है। डीआरडीओ द्वारा बनाया गया नया मिसाइल इस मामले में किसी से कम नहीं है। यह अपने अपने टारगेट की ओर 5,367 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ता है। यह भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात पुराने बराक वन सरफेस टू एयर मिसाइल की जगह लेगा। इस मिसाइल की लंबाई 3.84 मीटर और व्यास 178 एमएम है।

समुद्र की सतह के करीब उड़ रहे टारगेट को भी करेगा नष्ट
युद्धपोत पर हमला करने के लिए कई बार समुद्र की सतह के करीब उड़ने वाले मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है। लड़ाकू विमान भी समुद्र की सतह के करीब उड़ते हुए युद्धपोत के करीब जाने की कोशिश करते हैं ताकि वे युद्धपोत पर लगे रडार की पकड़ में आने से बच सकें। डीआरडीओ द्वारा बनाया गया VL-SRSAM ऐसे टारगेट को भी नष्ट कर सकता है।

युद्धपोत के लिए क्यों जरूरी है सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल
समुद्र में तैनात युद्धपोत आकार में बड़े होते हैं और इनकी रफ्तार कम होती है। रडार और टोही विमानों की मदद से इन्हें खोज पाना आसान होता है। इसके चलते लड़ाई के वक्त इनपर हमला करना आसान होता है। एंटी शिप मिसाइल, लड़ाकू विमान, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसे हथियारों से उनपर हमला किया जा सकता है। इन हमलों से बचने के लिए यह जरूरी होता है कि युद्धपोत के पास सुरक्षा के इंतजाम हों। सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल इसी काम के लिए बने होते हैं। इन्हें लड़ाकू विमान, मिसाइल, हेलिकॉप्टर और ड्रोन जैसे हवाई खतरे को नष्ट करने के लिए फायर किया जाता है।

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