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दिल्ली में पॉल्युशन से टेंशन, सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम, साइलेंट किलर को लेकर बीमार लोगों को Alert

दिल्ली में पॉल्युशन से टेंशन, सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम, साइलेंट किलर को लेकर बीमार लोगों को Alert

नई दिल्ली. दिल्ली-NCR में पॉल्युशन को लेकर हाहाकार मच गया है। पॉल्युशन से निपटने जहां सख्त आदेश निकाले जा रहे हैं, वहीं, राजनीति भी चरम पर है। इस बीच दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली के सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम होगा। दिल्ली में हॉटस्पॉट्स पर वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। 

 ये है गाइडलाइन
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने शुक्रवार को एक हाईलेवल मीटिंग में कहा कि प्राइमरी स्कूल बंद करने के साथ ही पांचवी से ऊपर के स्कूलों में आउटडोर एक्टविटी भी बंद रहेंगी। दिल्ली में ऑड-ईवन पर भी विचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट दफ़्तरों से भी बात की जा रही है कि वे भी वर्क फ्रॉम होम लागू करें। दिल्ली सरकार के 50% कर्मचारी शनिवार से वर्क फ़्राम होम करेंगे। 500 प्राइवेट बसें हायर की जा रही हैं, ताकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाया जा सके।

उधर, वायु प्रदूषण को लेकर NHRC ने दिल्ली, 3 पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया है। बता दें कि राजधानी दिल्ली में एयर क्वालिटी गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार दिल्ली में 4 नवंबर को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 472 (गंभीर) श्रेणी में रही। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 5 नवंबर से प्रदूषण की स्थिति में सुधार होने तक दिल्ली के सभी प्राइमरी स्कूल बंद करने का ऐलान किया है। 

वायु प्रदूषण को लेकर NHRC ने दिल्ली, 3 पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब किया
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से चिंतित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को इस मामले पर चर्चा के लिए 10 नवंबर को पेश होने को कहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि वह इस मुद्दे के समाधान के लिए अब तक की गई कार्रवाइयों से संतुष्ट नहीं हैं और दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे 426 (गंभीर) रहा। 400 से ऊपर एक्यूआई को ‘गंभीर’ माना जाता है और यह स्वस्थ लोगों को प्रभावित कर सकता है और मौजूदा बीमारियों वाले लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

पराली के मामले में एक सप्ताह के भीतर बताने को कहा
एनएचआरसी ने मुख्य सचिवों को पराली जलाने को रोकने के लिए अपनी-अपनी सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में एक सप्ताह के भीतर सूचित करने को कहा है। उनकी रिपोर्ट में स्मॉग टावरों और एंटी-स्मॉग गन के प्रभाव के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। इसमें यह भी जानकारी होनी चाहिए कि कितनी एंटी स्मॉक गन चालू हैं और निकट भविष्य में दिल्ली और अन्य सरकारें क्या कदम उठा रही हैं। एनएचआरसी के बयान में कहा गया है, “पंजाब और हरियाणा की रिपोर्ट में फसल अवशेषों के यथास्थान प्रबंधन की योजना के प्रभाव के बारे में विशेष रूप से सूचित किया जाना चाहिए।”

आयोग ने कहा कि उसके निर्देश 22 जून को जारी एक नोटिस के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF और CC) से प्राप्त एक रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर सामग्री का पालन करते हैं। इसने कहा कि उसने मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लेने के बाद नोटिस जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वायु प्रदूषण भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा है और दिल्ली के लोगों के लिए जीवन प्रत्याशा यानी आयु कम कर सकता है। बयान में कहा गया है, “आयोग ने अब तक किए गए उपायों को नोट किया है, लेकिन पाया है कि ये दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यह माना जाता है कि प्रदूषण के स्तर को तुरंत कम करने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है।”

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक इसके आसपास के राज्यों में पराली जलाना है। NHRC ने आगे कहा कि “सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और अन्य अधिकारियों के कई निर्देशों के बावजूद, दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में मानव-अनुकूल वातावरण के लिए आवश्यक सुधार नहीं देखा गया है।”  शुक्रवार सुबह 9:10 बजे सीपीसीबी के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली के 36 निगरानी स्टेशनों में से 31 ने ‘गंभीर’ एक्यूआई दर्ज किया गया।

बच्चे, बुजुर्ग और जिनके फेफड़े और दिल कमजोर हैं, उन्हें ऐसी जगहों पर नहीं जाना चाहिए जहां प्रदूषण हो। यदि आप जाना चाहते हैं, तो दिन में जाएं जब धूप हो और मास्क पहनें। वायु प्रदूषण को हम साइलेंट किलर कह सकते हैं। प्रदूषण से लोगों की मृत्यु हो रही हैं और जीवन स्तर कम हो रहा है। AIIMS में वायु प्रदूषण बढ़ते ही सांस की तकलीफ वाले मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। गर्भवती महिलाओं और होने वाले बच्चों पर भी इसका बुरा असर होता है-एम्स के पूर्व निदेशक डॉ .रणदीप गुलेरिया

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