बॉर्डर पर टेंशन देने वाले चीन की 3560 कंपनियां भारत में एक्टिव, भारत के लिए बड़ा खतरा बना ‘चाइना का माल’

बॉर्डर पर टेंशन देने वाले चीन की 3560 कंपनियां भारत में एक्टिव, भारत के लिए बड़ा खतरा बना ‘चाइना का माल’

नई दिल्ली. अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 9 दिसंबर को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प ने सीमा पर टेंशन बढ़ा दी है। हालांकि इसमें चीन की PLA सेना को अधिक नुकसान पहुंचा है। भारत के जहां 6 सैनिक घायल हुए हैं, वहीं चीन के 20 सैनिकों को मार खानी पड़ी है। चीन के 300-400 सैनिकों ने LAC पर तवांग सेक्टर के यांगसे में घुसपैठ की थी। इस हमले के बाद चीन प्रॉडक्ट्स को लेकर फिर से चर्चा छिड़ गई है। बता दें कि चीन से बढ़ते आयात के चलते भारत को बड़ा व्यापार घाटा हो रहा है। पढ़िए डिटेल्स…?

और बिगड़ेंगे भारत-चीन संबंध
अरुणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तपीर गाओ(Tapir Gao) ने कहा कि तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control-LAC) पर भारत और चीन के बीच हुई ‘सीमा की घटनाएं’ दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित करेंगी। पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों के बीच 30 महीने से अधिक समय से जारी सीमा गतिरोध के बीच पिछले शुक्रवार(9 दिसंबर) को संवेदनशील क्षेत्र में LAC के पास यांग्त्से के पास झड़प हुई थी। तपीर ने सोमवार को एक वीडियो संदेश में कहा, ”जब मैंने 9 दिसंबर की घटना के बारे में सुना, तो मैं आहत हुआ। मैं इसकी निंदा करता हूं। इस तरह की सीमा घटनाएं दोनों देशों के संबंधों के लिए खराब हैं।” अरुणाचल पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद गाओ ने कहा कि भारत और चीन की सरकारों को संबंधों को बेहतर बनाने पर काम करना चाहिए।

सेना ने किया था खुलासा
सेना ने एक बयान में कहा, “9 दिसंबर को, PLA के सैनिकों ने तवांग सेक्टर में एलएसी पर घुसपैठ की, जिसका खुद के (भारतीय) सैनिकों ने दृढ़ता से मुकाबला किया। इस आमने-सामने की लड़ाई में दोनों पक्षों के कुछ कर्मियों को मामूली चोटें आईं।” बयान में कहा गया है,”दोनों पक्ष तुरंत क्षेत्र से हट गए। घटना के बाद, क्षेत्र में अपने (भारतीय) कमांडर ने शांति और शांति बहाल करने के लिए संरचित तंत्र(structured mechanisms) के अनुसार इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने समकक्ष के साथ एक फ्लैग मीटिंग की।” 

लंबे समय से चला आ रहा विवाद
दशकों से भारत और चीन के बीच 2,100 मील की सीमा के साथ कई विवाद-दावे होते आ रहे हैं, जो लगभग पूरे हिमालयी क्षेत्र में फैला हुआ है। 1962 में, जब देशों ने विवादित क्षेत्रों पर उच्च ऊंचाई वाले युद्ध लड़े, तो चीन ने भारतीय नियंत्रण में लौटने से पहले अरुणाचल प्रदेश पर कब्जा कर लिया, जिसे वह दक्षिण तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है।

व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ सकता है असर
morningexpress.in की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने सोमवार को कहा कि भारत में 3560 कंपनियां ऐसी हैं, जिनमें चीनी निदेशक हैं। कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘कॉरपोरेट डेटा मैनेजमेंट (सीडीएम) के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 3560 कंपनियां ऐसी हैं जिनमें चीनी निदेशक हैं। चीनी निवेशकों और शेयरधारकों वाली कंपनियों की संख्या बताना संभव नहीं है, क्योंकि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के सिस्टम में डेटा अलग से नहीं रखा जाता है। कॉरपोरेट डेटा मैनेजमेंट (सीडीएम) पोर्टल को मंत्रालय द्वारा इन-हाउस डेटा एनालिटिक्स और बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट के रूप में विकसित किया गया है।

भारत कई चीजों के लिए चीन पर निर्भर
तनाव के बावजूद भारत-चीन व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हालांकि चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में इस पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत कई चीजों के लिए चीन पर निर्भर होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003-2004 में भारत का चीन से आयात करीब 4.34 अरब डॉलर था। लेकिन साल 2013-14 तक यह बढ़कर करीब 51.03 अरब डॉलर हो गया। ऐसे में 10 साल में आयात दस गुना से ज्यादा बढ़ गया।

व्यापार घाटा बढ़ता गया
वर्ष 2004-05 में भारत और चीन के बीच 1.48 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था। वर्ष 2013-14 में यह बढ़कर 36.21 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत और चीन का व्यापार घाटा 44.33 अरब डॉलर था। लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान यह बढ़कर करीब 73 अरब डॉलर हो गया है। सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 43.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2020-21 में चीन ने भारत को 65.21 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया। लेकिन वित्त वर्ष 2021-22 में यह तेजी से बढ़ा और 94.57 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

बता दें कि आयात और निर्यात(Import and Export) के अंतर को व्यापार संतुलन (Balance of Trade) कहते हैं। जब कोई देश निर्यात की तुलना में आयात अधिक करता है, तो उसे व्यापार घाटे (Trade Deficit) का सामना करना पड़ता है।

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