पुराने लड़ाकू विमानों को जल्द रिप्लेस करेगा Mk2, प्रोजेक्ट डायरेक्टर वी मधुसूदन ने बताई विमान की खूबियां

पुराने लड़ाकू विमानों को जल्द रिप्लेस करेगा Mk2, प्रोजेक्ट डायरेक्टर वी मधुसूदन ने बताई विमान की खूबियां

Defence Expo 2022: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 अक्टूबर, 2022 को गुजरात के गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो 2022 का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने गुजरात के बनासकांठा पाटन के पास मौजूद भारतीय वायुसेना के डीसा एयरफील्ड का वर्चुअली शिलान्यास किया। यह वायुसेना का 52वां स्टेशन है। यह पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सिर्फ 130 किलोमीटर दूर है। बता दें कि भारतीय वायु सेना 2035 तक अपने 15 लड़ाकू विमान स्क्वाड्रनों को रिटायर कर उन्हें हल्के लड़ाकू विमान Mk2 से बदल देगी। इसके अलावा जगुआर लड़ाकू विमान के 6 स्क्वाड्रन 2032 तक रिटायर होंगे। मिग-21 के तीन स्क्वाड्रन को 2024 तक रिटायर  किया जाएगा। इसके बाद मिराज 2000 और मिग-29 बेड़े में से हर एक के तीन स्क्वाड्रनों को चरणबद्ध तरीके से अगले दशक तक रिटायर किया जाएगा। 

एशियानेट ने प्रोजेक्ट डिटेल्स और टाइमलाइन के बारे में और अधिक जानने के लिए LCA Mk 2 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉक्टर वी मधुसूदन राव से बात की। डॉक्टर वी मधुसूदन राव ने कहा- एलसीए एमके 2 एलसीए एमके1 और एमके1 अल्फा की तरह नहीं है। ये एक नया डिजाइन है और इसे मिराज 2000, मिग-29 और जगुआर लड़ाकू विमानों को रिप्लेस करने के लिए पहले से काफी ज्यादा मजबूत बनाया गया है। LCA Mk 2 विमान 6.5 टन हथियार ले जा सकता है और इसमें 11 हार्ड पॉइंट हैं, जबकि एमके 1 में सात हार्ड पॉइंट हैं।

Mk1 से कहीं ज्यादा पावरफुल है Mk2 : 
वी मधुसूदन राव के मुताबिक, वी मधुसूदन राव Mk1 में 2,450 किलोग्राम (लीटर) आंतरिक ईंधन ले जाने की क्षमता है, जबकि Mk2 में 3,320 किलोग्राम है। इतना ही नहीं Mk2 4700 किलोग्राम ईंधन बाहरी रूप से ले जा सकता है। इसके अलावा एक और चीज है जो Mk2 को यूनीक बनाती है। ये है ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जेनरेटिंग सिस्टम। Mk1 और Mk1A में पायलट केवल एक ऑक्सीजन बॉटल ले जा सकता है, जिसकी अधिकतम क्षमता 1-2 घंटे होती है। वहीं Mk2 में यह 8 घंटे तक है। 

ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जेनरेटिंग सिस्टम : 
ऑनबोर्ड ऑक्सीजन जेनरेटिंग सिस्टम (OBOGS) एक आत्मनिर्भर ऑक्सीजन उत्पादन तकनीक है, जिसे DRDO LCA तेजस उड़ाने वाले वायुसेना के पायलटों के लिए इस्तेमाल करता है। ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन के स्तर में तेजी से होने वाली कमी की भरपाई के लिए इस तकनीक को लड़ाकू विमान के कॉकपिट में लगाया जाता है।

1350 किलोग्राम का स्कैल्प बम ले जाने में सक्षम : 
वी मधुसूदन ने आगे बताया कि LCA Mk2 में अलग-अलग हथियारों को एकीकृत किया गया है, जिनमें फ्रेंच, वेस्टर्न और रूसी वेपंस शामिल हैं। इन्हें डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। Mk2 के विंग को चौड़ा कर दिया गया है, जिससे ये 1350 किलोग्राम का स्कैल्प बम ले जाने में भी सक्षम है।

ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल : 
डॉक्टर वी मधुसूदन के मुताबिक, Mk2 में Mk1 और Mk1A की तुलना में कहीं ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसके इंजन का निर्माण भारत में किया गया है। इसके लिए हमने GE कंपनी से एक समझौता भी किया है। हम जल्द ही इसे 90% तक स्वदेशी तकनीक से बनाने लगेंगे। 

फरवरी, 2021 में HAL से हुआ था समझौता : 
बता दें कि सरकार ने फरवरी, 2021 में IAF को 83 LCA Mk1A की आपूर्ति के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ एक समझौता किया था। अगस्त 2021 में, HAL ने Mk-1A को और अधिक ताकत देने के लिए 99 F404 जेट इंजन के लिए अमेरिका की GE एविएशन के साथ 716 मिलियन डॉलर का एक समझौता किया था। बता दें कि Mk-2 को GE-F414-INS6 इंजन और ज्यादा पावर देगा। 

2027 तक Mk2 के 4 प्रोटोटाइप बनाने का लक्ष्य : 
लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट Mk2 का पहला प्रोटोटाइप, दिसंबर 2023 तक शुरू होने की उम्मीद है। 2035 तक, मिग-29, मिराज 2000 और जगुआर के सभी स्क्वाड्रन रिटायर हो जाएंगे। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने दिसंबर, 2024 में LCA Mk2 की पहली उड़ान के लिए एक लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही 2027 तक 4 प्रोटोटाइप बनाने का लक्ष्य भी है।

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