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दिग्विजय सिंह ने अचानक RSS–BJP की ‘तारीफ’ क्यों की? कांग्रेस में मचा सियासी घमासान,अब तक क्या हुआ, किसने क्या कहा

दिग्विजय सिंह ने अचानक RSS–BJP की ‘तारीफ’ क्यों की? कांग्रेस में मचा सियासी घमासान,अब तक क्या हुआ, किसने क्या कहा

कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की अहम बैठक से ठीक पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का एक सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी के भीतर बड़े विवाद की वजह बन गया। इस पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक ताकत का जिक्र करते हुए उसकी प्रशंसा जैसी बात कही, जिससे कांग्रेस के अंदर हलचल तेज हो गई।

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पुरानी तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर में 1990 के दशक के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गुजरात में एक कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं और उनके पास जमीन पर बैठे युवा नरेंद्र मोदी दिखाई देते हैं। पोस्ट के साथ दिग्विजय सिंह ने लिखा कि किस तरह RSS के जमीनी स्वयंसेवक और जनसंघ–बीजेपी के कार्यकर्ता संगठन के भीतर आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक बनते हैं। उन्होंने इसे संगठन की ताकत का उदाहरण बताया और अंत में ‘जय सिया राम’ लिखा।

यह पोस्ट सामने आते ही कांग्रेस के भीतर नाराजगी बढ़ गई। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई लड़ रही है, ऐसे समय में RSS–BJP की तारीफ जैसा बयान क्यों दिया गया।

दिग्विजय सिंह की सफाई

विवाद बढ़ने के बाद दिग्विजय सिंह ने अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा-“मुझे जो कहना था, मैंने कह दिया है। कृपया एक बात समझ लें, मैं 50 साल से कांग्रेस पार्टी में हूं और मैंने इन सांप्रदायिक ताकतों से हर जगह लड़ाई लड़ी है—चाहे वह विधानसभा हो, संसद हो या संगठन।”

उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया और कुछ लोग उनके बयान का गलत मतलब निकाल रहे हैं। उनका कहना था कि उन्होंने सिर्फ संगठन की कार्यप्रणाली की बात की है, न कि विचारधारा का समर्थन किया है।

राजीव शुक्ला का बयान

इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने पार्टी की ओर से सफाई देते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह पूरी तरह कांग्रेस के साथ हैं।
उन्होंने कहा-“दिग्विजय सिंह पार्टी के साथ पूरी तरह से जुड़े हुए हैं। कल भी थे और आज भी हैं। इस बात को बेवजह बढ़ाया जा रहा है। इस तरह की कोई बात नहीं है।”

राजीव शुक्ला ने साफ किया कि पार्टी के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है और इसे अनावश्यक विवाद का रूप दिया जा रहा है।

शशि थरूर की प्रतिक्रिया

वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी इस मुद्दे पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा-“कांग्रेस का 140 साल का इतिहास है, उसमें सीखने के लिए बहुत कुछ है। हम अपने आप से भी सीख सकते हैं। अनुशासन सीखना बहुत जरूरी है, चाहे आप किसी भी पार्टी में हों। दिग्विजय सिंह के बारे में आप उनसे ही पूछिए।”

शशि थरूर के बयान को विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अंदरूनी राजनीति और समय का सवाल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल जनवरी 2026 में खत्म हो रहा है और उनके अगले कार्यकाल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में उनके बयान को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

बीजेपी ने साधा निशाना

इस विवाद को भारतीय जनता पार्टी ने भी हाथोंहाथ लिया। बीजेपी नेताओं ने इसे कांग्रेस के भीतर मतभेद का सबूत बताते हुए राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा।

कांग्रेस में क्या चल रहा है?

फिलहाल कांग्रेस कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रही है—मनरेगा, चुनावी सुधार, सांप्रदायिक सद्भाव और लोकतंत्र जैसे सवालों पर। लेकिन इस विवाद ने पार्टी की एकता और संगठनात्मक मजबूती को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

कुल मिलाकर, दिग्विजय सिंह के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सिर्फ संगठनात्मक विश्लेषण था या कांग्रेस के भीतर चल रही बेचैनी का संकेत। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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