क्या है दिल्ली आबकारी नीति केस? केजरीवाल-सिसोदिया कितने दिन रहे जेल में, समझिए पूरा मामला

क्या है दिल्ली आबकारी नीति केस? केजरीवाल-सिसोदिया कितने दिन रहे जेल में, समझिए पूरा मामला

दिल्ली की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में जिस मामले ने सबसे ज्यादा हलचल मचाई, वह था कथित शराब (आबकारी) नीति घोटाला। इस मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आए। जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी एजेंसियां शामिल हुईं। 27 फरवरी 2026 को अदालत ने सीबीआई मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। आइए इस पूरे घटनाक्रम को पांच प्रमुख हिस्सों में समझते हैं।

नई आबकारी नीति क्या थी और क्यों लाई गई?

दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर 2021 को नई आबकारी नीति लागू की। सरकार का दावा था कि इसका उद्देश्य शराब बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी बनाना, अवैध कारोबार पर रोक लगाना और राजस्व बढ़ाना है। नई नीति के तहत दिल्ली को 32 जोनों में बांटा गया और प्रत्येक जोन में अधिकतम 27 दुकानें खोलने की अनुमति दी गई। कुल 849 दुकानों का प्रावधान था। सबसे बड़ा बदलाव यह था कि शराब की खुदरा बिक्री पूरी तरह निजी हाथों में दे दी गई। पहले लगभग 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत निजी थीं, लेकिन नई नीति में 100 प्रतिशत निजीकरण कर दिया गया। सरकार का अनुमान था कि इससे करीब 3,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है।

लाइसेंस फीस और मुनाफे पर क्यों उठा विवाद?

नई नीति में लाइसेंस फीस में भारी वृद्धि की गई। उदाहरण के लिए, एल-1 लाइसेंस की फीस 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इससे छोटे व्यापारी बाहर हो गए और बड़े कारोबारी ही बाजार में टिक पाए। इसके अलावा शराब की कीमतों और मुनाफे के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठे। आरोप था कि खुदरा विक्रेताओं का मुनाफा बढ़ा, जबकि सरकार को मिलने वाला कर घट गया। हालांकि दिल्ली सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राजस्व संरचना को पुनर्गठित किया गया था और इससे दीर्घकाल में फायदा होना था।

जांच कैसे शुरू हुई और एजेंसियां कैसे जुड़ीं?

जब नीति को लेकर विवाद बढ़ा, तो दिल्ली के उपराज्यपाल ने जांच की सिफारिश की। अगस्त 2022 में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की और आरोप लगाया कि नीति बनाते समय नियमों का उल्लंघन हुआ। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) का मामला दर्ज किया। सीबीआई जहां नीति निर्माण और लागू करने में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही थी, वहीं ईडी इस बात की पड़ताल कर रही थी कि क्या इस नीति के जरिए अवैध धन का लेन-देन हुआ।

गिरफ्तारियां और जेल में बिताए दिन

इस मामले में कई गिरफ्तारियां हुईं।

  • सितंबर 2022: विजय नायर गिरफ्तार
  • मार्च 2023: मनीष सिसोदिया गिरफ्तार
  • अक्टूबर 2023: संजय सिंह गिरफ्तार
  • मार्च 2024: अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार

मनीष सिसोदिया मार्च 2023 से करीब 17 महीने तक जेल में रहे, जब तक उन्हें जमानत नहीं मिली।
अरविंद केजरीवाल मार्च 2024 में गिरफ्तार हुए और कई महीनों तक न्यायिक हिरासत में रहे। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम और फिर नियमित जमानत मिली। (जेल में बिताए गए दिनों की अवधि सीबीआई और ईडी मामलों के अनुसार अलग-अलग रही।)

अदालत का फैसला और राजनीतिक असर

लंबी जांच और सुनवाई के बाद 27 फरवरी 2026 को अदालत ने सीबीआई मामले में केजरीवाल, सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश की हार बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि ईडी से जुड़े पहलुओं में कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

दिल्ली आबकारी नीति मामला केवल एक प्रशासनिक नीति का विवाद नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित किया। जांच एजेंसियों की भूमिका, नीति निर्माण की पारदर्शिता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने इसे देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल कर दिया। अदालत के फैसले के बाद कानूनी लड़ाई का एक अहम चरण समाप्त हो चुका है, लेकिन इस मुद्दे की राजनीतिक गूंज आने वाले समय में भी सुनाई देती रह सकती है।

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