वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया। इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के पीछे अमेरिका की सबसे खतरनाक और गोपनीय स्पेशल यूनिट डेल्टा फोर्स का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई महीनों की गुप्त तैयारी, अत्याधुनिक तकनीक और सेकंडों में लिए गए फैसलों का नतीजा थी।
कैसे शुरू हुआ वेनेजुएला ऑपरेशन?
अमेरिका ने मादुरो को हिरासत में लेने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य और खुफिया तैयारी की थी। जिस रात कराकस की सड़कों पर सन्नाटा था, उसी समय वेनेजुएला का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय किया जा चुका था। आम लोगों को कुछ समझ में आता, उससे पहले ही अमेरिकी कमांडो राष्ट्रपति के सबसे सुरक्षित इलाके तक पहुंच चुके थे।
ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों से करीब 150 लड़ाकू और सपोर्ट एयरक्राफ्ट ने उड़ान भरी। लगभग एक घंटे तक वेनेजुएला के अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। टॉमहॉक मिसाइलों के जरिए रूसी तकनीक से बने S-300 एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय कर दिया गया। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमानों ने संचार व्यवस्था को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे वेनेजुएला की सेना आपस में संपर्क तक नहीं कर सकी।
जब जमीन पर उतरी डेल्टा फोर्स
पूरे मिशन के दौरान अमेरिकी सैटेलाइट, रीपर ड्रोन और खुफिया एजेंसियां हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थीं। जब डेल्टा फोर्स के कमांडो जमीन पर उतरे, तब तक सैन्य प्रतिरोध लगभग खत्म हो चुका था।
MH-60 ब्लैक हॉक और MH-47 चिनूक हेलीकॉप्टरों के जरिए कमांडो वेनेजुएला के भीतर दाखिल हुए। बेहद सटीक और तेज कार्रवाई करते हुए उन्होंने मादुरो को हिरासत में ले लिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे ऑपरेशन में किसी भी अमेरिकी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई।
महीनों की प्लानिंग, सेकंडों में एक्शन
इस मिशन की निगरानी कर रहे अमेरिकी जनरल डैन केन के अनुसार, यह ऑपरेशन दशकों के सैन्य अनुभव पर आधारित था। हवाई, जमीनी, समुद्री और अंतरिक्ष अभियानों का एक साथ समन्वय किया गया था। खुफिया एजेंसियों ने महीनों तक मादुरो की दिनचर्या, सुरक्षा घेरा और मूवमेंट पैटर्न का अध्ययन किया था। यही वजह रही कि जब उनके कमरे का दरवाजा तोड़ा गया, तो बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।
क्या है डेल्टा फोर्स, जिसे कहा जाता है ‘द यूनिट’?
डेल्टा फोर्स का आधिकारिक नाम 1st Special Forces Operational Detachment–Delta है। इसे अमेरिका के सबसे संवेदनशील और खतरनाक मिशनों के लिए तैयार किया गया है। इस यूनिट का गठन 1977 में कर्नल चार्ली बेकविथ ने किया था, जिन्होंने ब्रिटेन की मशहूर स्पेशल यूनिट SAS के मॉडल पर इसे खड़ा किया। लंबे समय तक इसे सिर्फ “द यूनिट” के नाम से जाना जाता रहा।
कितनी खतरनाक होती है डेल्टा फोर्स की ट्रेनिंग?
डेल्टा फोर्स में शामिल होना बेहद कठिन माना जाता है। चयन प्रक्रिया इतनी सख्त होती है कि अधिकांश सैनिक बीच में ही बाहर हो जाते हैं।
कमांडो को कई हफ्तों तक कठिन नेविगेशन मार्च, भारी वजन के साथ 40 मील तक पैदल चलना, मानसिक दबाव और नींद की कमी जैसी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। इसके बाद महीनों की स्पेशल ऑपरेटर ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें एडवांस हथियार, सीक्रेट मिशन, काउंटर-टेररिज्म और हाई-रिस्क ऑपरेशन सिखाए जाते हैं।
‘ब्लैक हॉक डाउन’ से मिली पहली झलक
डेल्टा फोर्स पहली बार 1993 में सोमालिया के मोगादिशु ऑपरेशन के दौरान दुनिया की नजर में आई थी। यही मिशन बाद में Black Hawk Down के नाम से मशहूर हुआ। भारी नुकसान के बावजूद डेल्टा फोर्स ने घिरे हुए सैनिकों को बचाकर अपनी क्षमता साबित की थी।
वेनेजुएला ऑपरेशन ने फिर साबित की ताकत
मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर दिखा दिया कि डेल्टा फोर्स को अमेरिका की सबसे भरोसेमंद और खतरनाक सैन्य यूनिट क्यों माना जाता है। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि अमेरिका की रणनीतिक, तकनीकी और खुफिया ताकत का बड़ा प्रदर्शन भी माना जा रहा है।




