देहरादून, 8 अगस्त 2021

उत्तराखंड में 2025 तक हर हाल में टीबी उन्मूलन कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने अधिकाारियों को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी क्षमता के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने रविवार को टीबी उन्मूलन व जागरुकता के लिए तैयार की गई लघु फिल्म का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत की परिकल्पना की गई है। इसी के तहत उत्तराखंड को भी इससे पहले क्षय रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कार्यक्रम के तहत सभी मरीजों की पहचान कर उनका बेहतर इलाज किया जाए। इसके साथ ही कुपोषण की समस्या के समाधान के लिए भी प्रयास किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि टीबी के हर मरीज को निशुल्क जांच, उपचार, दवाई उपलब्ध कराई जाए। एनएचएम की एमडी सोनिका ने इस दौरान बताया कि राज्य में टीबी के मरीजों को निशुल्क दवा के साथ साथ हर माह पोषाहार के लिए पांच सौ रुपये की राशि भी डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। अभी तक अप्रैल 2018 से 16 करोड़ 90 लाख आवंटित किए जा चुके हैं।

154 केंद्रों पर जांच की सुविधा
एमडी एनएचएम ने बताया कि राज्य के 13 जिलों में कुल 154 जांच केंद्र बनाए गए हैं जहां मरीजों को टीबी जांच की सुविधा दी जा रही है। राज्य में 95 छय नियंत्रण केंद्र भी बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि ड्रग रेसिस्टेंस ट्यूबरक्लोसिस रोगियों के इलाज के लिए पीएमडीटी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। ऐसे रोगियों को हिमालयन इंस्टीट्यूट जौलीग्रांट और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में डीआरटीबी साइट बनाई गई हैं। महानिदेशक स्वास्थ्य डॉ तृप्ति बहुगुणा ने बताया कि राज्य में इस समय कुल 12289 टीबी रोगियों का इलाज किया जा रहा है। देहरादून में सर्वाधिक 2824, हरिद्वार में 2742, यूएस नगर मे 2058 जबकि नैनीताल में 1975 टीबी के मरीज हैं। चंपावत में सबसे कम 124 मरीज हैं।