
देहरादून, 3 सितम्बर 2021
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आसमानी आफत ने मुनस्यारी के सैणराथी गांव के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारी बारिश के बाद गांव के ठीक ऊपर की जमीन दरकने लगी है। जमीन में 300 मीटर लंबी व 3 मीटर चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। इससे 80 परिवारों वाला यह गांव आपदा की जद में आ गया है। प्रशासन ने सुरक्षा और अनहोनी की आशंका के चलते 13 परिवारों के 80 लोगों को शिफ्ट कर दिया है। अन्य परिवारों को शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने भू-वैज्ञानिकों की टीम भी आपदा का जायजा लेने और सर्वे के लिए भेजी है।
पिछले दिनों सैणराथी गांव में बारिश ने जमकर कहर बरपाया। गांव में जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। इसी बीच बुधवार को गांव के ठीक ऊपर भूमि में 300 मीटर लंबी व एक मीटर चौड़ी दरार पड़ गई। इससे खतरा कई गुना बढ़ गया है। जमीन दरकने से पूरे गांव पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। जमीन में दरार पड़ने से ग्रामीणों में दहशत है। सूचना के बाद राजस्व की टीम गांव पहुंची और स्थिति का जायजा लिया।
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी राम चौहान के अनुसार राजस्व टीम को मौके पर भेज कर हालात का जायजा लिया गया है। आपका को देखने के लिए भू-वैज्ञानिकों की टीम भी भेजी जा रही है। मुनस्यारी के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट अभय प्रताप सिंह के अनुसार जमीन फटने के कारण कई मकानों पर खतरा मंडराने लगा है। इसी को देखते हुए 80 से ज्यादा ग्रामीणों को यहां से सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव की जमीन धीरे-धीरे नदी के नीचे की ओर खिसकने लगी है। गांव के भगत सिंह बचामी ने बताया कि हमने अपने जीवन में इस तरह की घटना पहले कभी नहीं देखी थी।
नदी की ओर खिसक रही जमीन
जिला भूविज्ञान अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि गांव की जमीन पास में बहने वाली नदी की ओर खिसकने के कारण दरारें आई हैं। उन्होंने कहा कि मैंने दरारों की तस्वीरें और वीडियो देखे हैं, दरारें गांव के पास बहने वाली नदी की ओर जमीन के धीरे-धीरे खिसकने के कारण ही है। इन घटनाओं ने ग्रामीणों को डरा दिया है, क्योंकि पिछले रविवार को बादल फटने से हुए भूस्खलन में पांच लोगों की मौत हो गई थी। इन सभी के बावजूद पिथौरागढ़ टनकपुर नेशनल हाइवे 12 दिन बाद खुल गया है। इस रोड के बंद होने से चंपावत और पिथौरागढ़ के व्यापारियों को सामानों की आपूर्ति नहीं होने से बड़ा नुकसान हुआ है।
पिथौरागढ़ में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता एलडी मथेला ने बताया कि चंपावत के पास स्वाला गांव में लगातार भूस्खलन और बोल्डर गिरने के कारण राजमार्ग नहीं खोला जा सका था। मथेला के अनुसार इस रोड पर भूस्खलन अप्रत्याशित था। लोगों के दबाव के बाद इंजीनियरों ने यहां विशेष पूजा की भी इजाजत दी।
यहां के व्यापारिक संगठनों के अनुसार करीब दस हजार कारोबारियों को रोड बंद होने से नुकसान हुआ है। चंपावत के कारोबारी सिद्धार्थ भसीन ने कहा कि हम पहले 500 बोरी सिमेंट रोज बेचते थे। लेकिन रोड बंद होने से कारोबारी बुरी तरह प्रभावित हो गया। पिथौरागढ़ के नवल रावत ने कहा कि इतने लंबे समय तक नेशनल हाइवे पहली बार बंद हुआ है। इससे पहले ज्यादा से ज्यादा आठ दिन तक बंद रहा है।







