
देहरादून, 9 अगस्त 2021
टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत के लिए पहला गोल्ड जीतने वाले नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) आज पूरे देश के हीरो बन चुके हैं. उनकी इस कामयाबी के पीछे रुड़की टोडा कल्याणपुर निवासी नसीम अहमद (Naseem Ahmed) की पाठशाला का भी बड़ा योगदान रहा है. नसीम ने पंचकुला हरियाणा में रहकर ही जैवलिन थ्रो की बारीकियों को परखा था.
गौरतलब है कि 14 साल पहले हरियाणा सरकार ने रुड़की टोडा कल्याणपुर निवासी नसीम अहमद को बतौर कोच पंचकुला के रेजिडेंसियल हॉस्टल में भेजा था. इसी दौरान 2011 में नीरज चोपड़ा कोच नसीम अहमद की पाठशाला में आ गए थे. कोच नसीम अहमद का कहना है कि नीरज ने 2016 में पोलैंड में अंडर -20 एशियन ट्रैक फील्ड में गोल्ड जीता था. उसके बाद एशियन चैम्पिनशिप और कॉमन वेल्थ गेम में नीरज ने गोल्ड मेडल जीता था. कोच नसीम अहमद ने फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि वह आज बहुत खुश हैं और 13 अगस्त को नीरज चोपड़ा पंचकूला पहुंचेंगे. उनके स्वागत के लिये सभी खिलाड़ी और देशवासी बेहद उत्साहित हैं.
उन्होंने बताया कि नीरज के अलावा और खिलाड़ी भी उनकी पाठशाला में खेल की बारीकियों को सीखते हैं. नीरज के अलावा पांच खिलाड़ियों ने इंटरनेशनल खेला है. वो आज बड़े पदों पर तैनात हैं. इसलिए उन्हें अपने काम पर गर्व होता है कि पाठशाला के बच्चे देश और दुनिया में उनका नाम रोशन कर रहे हैं.
कोच नसीम अहमद के करीबी दोस्त आईआईटी से रिटायर्ड कोच रहे हेमंत शर्मा का कहना है कि सरकारों ने स्पोर्ट्स पर ध्यान नहीं दिया, इसलिये आज उत्तराखंड के बड़े खिलाड़ी, कोच अन्य राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यदि सरकार उन्हें सभी सुविधाएं मुहैया करवा दे तो वे बाहरी राज्यों का रुख नहीं करेंगे. साथ ही उन्होंने कोच नसीम अहम को इस सफलता पर बधाई दी है.







