देहरादून, 29 सितम्बर 2021

उत्तराखंड में भूमि कानून की कवायद दिनोंदिन तेज़ होती जा रही है. अब खबर आ रही है कि उत्तराखंड सरकार अपने स्तर पर राज्य में भूमि कानून बनाने के लिए कुछ सूचनाएं और तथ्य हिमाचल प्रदेश के इसी तरह के कानून से जुटा रही है. राज्य में भूमि की खरीद-फरोख्त में क्षेत्रीयता के आधार पर कोई भेद नहीं होने की नीति को खत्म करने के लिए कानून बनाने जा रहे उत्तराखंड ने तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई है, जो इस बारे में कानून के लिए ज़रूरी अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. फिर सरकार इसी रिपोर्ट के आधार पर कोई फैसला करेगी.

कमेटी के चेयरमैन और रिटायर्ड आईएएस अफसर सुभाष कुमार के हवाले से एनआईई की एक रिपोर्ट में लिखा गया, ‘हम हिमाचल के लैंड लॉ से कुछ सूचनाएं जुटा रहे हैं. यह कमेटी इस बारे में सिफारिशें देगी कि किस तरह स्थानीय आबादी के लिए ज़मीन पर अधिकार संरक्षित किए जा सकते हैं, वो भी विकास कार्यों को बाधित किए बगैर.’ बता दें कि यह कमेटी तब बनाई गई थी जब उत्तराखंड के युवाओं ने बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा उत्तराखंड में ज़मीनें खरीदने के विरोध में आंदोलन शुरू किया था.

पहाड़ी इलाकों वाले राज्य में फिलहाल कोई भी नगरपालिका सीमा या कैंट क्षेत्रों में प्रॉपर्टी खरीद सकता है. एक नियम यह है कि नगरपालिका दायरे के बाहर 250 वर्गमीटर से ज़्यादा की कृषि भूमि नहीं खरीदी जा सकती, लेकिन इस नियम में आधिकारिक सरकारी अफसर और डीएम इजाज़त या छूट दे सकते हैं. उत्तराखंड में अन्य राज्यों के लोगों को कृषि भूमि की खरीदी में राहत पर्यटन नीति के तहत दी जा सकती है. यानी उत्तराखंड के पर्यटन में इज़ाफ़े को कोई प्रोजेक्ट अगर रोज़गार भी पैदा करता है, तो इस नीति के तहत राहत मिल सकती है.

‘उत्तराखंड मांगे भू कानून’ आंदोलन

गौरतलब है कि पिछले दिनों ही ‘उत्तराखंड मांगे भू कानून’ नाम से आंदोलन राज्य के युवाओं ने खड़ा किया जिसमें कलाकार, कार्टूनिस्ट भी जुड़ गए. यही नहीं, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी इसे मुद्दे के तौर पर खड़ा किया. इसके बाद से उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है.