देहरादून, 29 अगस्त 2021

कोरोना में अब तक अपने 7 हजार लोगों को गंवा चुका उत्तराखंड में अब भी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है. खासकर कोविड की थर्ड वेब के मददेनजर उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग के दावे कितने खोखले हैं. इसकी पोल खोलने का काम किया है. सरकार में ही कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने. महाराज ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और अपने कैबिनेट सहयोगी धन सिंह रावत को एक पत्र लिखा है.

इस पत्र में सतपाल महाराज ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल की दयनीय हालत बयान की है. पत्र में महाराज ने कहा है कि एक बड़ी आबादी इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है, लेकिन ये अस्पताल लोगों को बेसिक स्वास्थ्य सेवाएं भी नहीं दे पा रहा है. पत्र में 9 बिंदुओं पर स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान खींचा गया है. पत्र में मंत्री ने लिखा है कि इसके अलावा और भी अनियमितताएं इस हॉस्पिटल में है. कर्मचारियों को कई महीने से सैलरी तक नहीं मिली है. स्वास्थ्य मंत्री को लिखे इस पत्र में सतपाल महाराज ने कहा कि है कि पीपीपी मोड पर संचालित इस हॉस्पिटल को किसी अन्य को सौंपकर चिकित्सा सुविधा बहाल करने की कृपा करें. मामले में विभाग की किरकिरी हुई, तो स्वास्थ्य मंत्री ने तत्काल कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की मौजूदगी में अधिकारियों की मीटिंग बुला दी.

इन बिंदुओं पर स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र

-स्वास्थ्य केंद्र में न जनरल सर्जन है, न महिला चिकित्सक, एनेशथीसिया भी नहीं है.
-पैथॉलॉजी लैब तो है, लेकिन खून जांच करने की मशीन नहीं है.
-न ईसीजी मशीन है, न अल्ट्रासाउंड मशीन.
-एक एक्सरे मशीन है वो भी पुरानी है, जिसमें सीआर सिस्टम नहीं है.
-ऑपरेशन थियेटर में उपकरण नहीं हैं, नतीजा ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं.
-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन पाइप लाइन भी नहीं है.