मेरठ, 8 अगस्त 2021

अब आपके और संस्कृत (Sanskrit) सीखने के बीच मात्र एक मिस्ड कॉल का फासला है. मिस्ड कॉल के जरिए आप संस्कृत सीख सकते हैं. सुनने में अटपटा लगता है, लेकिन ये शुरुआत हो चुकी है. और लोगों ने देवभाषा सीखने में कितनी रुचि दिखाई है इसका अंदाजा़ इस बात से लगाइए कि अंडमान निकोबार से लेकर असम तक और गोवा से लेकर यूपी तक के हजारों लोग मिस्ड कॉल के ज़रिए संस्कृत सीख रहे हैं. मिस्ड कॉल से संस्कृ सीखने का क्या फॉर्मूला है. आइए जानते है.

एक मिस्ड कॉल पर कोई भाषा सीख जाना सुनने में थोड़ा अटपटा लग रहा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा एक अभियान चलाया जा रहा है, जिस अभियान के तहत एक मिस्ड कॉल आपको संस्कृत बोलना और पढ़ना सिखा देगी. यह मिस्ड कॉल उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान का अभियान है. इस अभियान से अब तक अलग-अलग राज्यों में आठ हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. संस्थान का दावा है कि रोज एक घंटे की क्लास से केवल 20 दिनों में उनके अभ्यर्थियों को संस्कृत बोलना और समझना सिखा देंगे. संस्थान अध्यक्ष डॉ.वाचस्पति मिश्र के अनुसार जो भी छात्र संस्कृत सीखने के इच्छुक हैं.  वो 9522340003 पर मिस्ड कॉल दे सकते हैं. जो छात्र दिए गए नंबर पर मिस्ड कॉल देंगे वे संस्कृत की ऑनलाइन क्लास के लिए रजिस्टर्ड हो जाएंगे.

अब तक 8.5 हजार छात्र सीख रहे संस्कृत
उत्तरप्रदेश संस्कृत संस्थान ने देवभाषा संस्कृत को जन जन तक पहुंचाने की इस अनूठी पहल का सभी स्वागत करते नजर आ रहे है. लोगों में देवभाषा सीखने को लेकर कितना उत्साह है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंडमान निकोबार, असम और गोवा से भी मिस्ड कॉल आई. इस संस्थान में अब तक 8.5 हजार छात्र संस्कृत सीखने में जुटे हैं. इसमें असम, मणिपुर, चंडीगढ़ से लेकर गोवा और गुजरात सहित अलग-अलग राज्यों से छात्र पढ़ रहे हैं. रिकॉर्ड के मुताबिक आंध्र प्रदेश से 66, असम से 57, बिहार से 132, चंडीगढ़ से 13, दादर एवं नगर हवेली से पांच, दिल्ली से 248, गुजरात को 217, हरियाणा से 164, कर्नाटक से 248, केरल से 16, मध्य प्रदेश से 324, महाराष्ट्र से 969, उडीसा से 81, पंजाब से 117, राजस्थान से 251, तेलांगाना से 129, उत्तर प्रदेश से 1635, उत्तराखंड से 138 और पश्चिमी बंगाल से 154 छात्र-छात्राएं संस्कृत सीख रहे हैं. डॉक्टर वाचस्पति मिश्र का कहना है कि दुनिया की कोई भाषा नहीं है जिसका जुड़ाव संस्कृत से न हो. वो कहते हैं कि अंग्रेज़ी भाषा भी संस्कृत से ही आई है. डॉक्टर मिश्र कई ऐसे उदाहरण देते हैं कि कैसे अंग्रेज़ी की जननी भी संस्कृत है.

ऐसे कर सकते हैं एनरॉल
डॉ. मिश्र के मुताबिक जो भी छात्र इस नंबर पर मिस्ड कॉल देगा. उस छात्र के मोबाइल में गूगल फॉर्म का लिंक पहुंच जाएगा. फॉर्म को भरते हुए छात्रों को समय चुनना होगा. संस्कृत के साथ ही यह संस्थान ज्योतिष, कर्मकांड, पुरोहित विधा, पाली एवं प्राकृत भाषा को सिखाने के लिए मिस्ड कॉल की सर्विस शुरू करेगा. संस्थान की तरफ से सुबह से लेकर शाम तक लोगों को वर्चुअली संस्कृत सिखाई जा रही है. वाकई में देवभाषा के उत्थान को लेकर हो रहा ये प्रयास अनोखा है.