वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किया गया 9.12 लाख करोड़ रुपये का बजट आकार में अब तक का सबसे बड़ा बजट है। Yogi Adityanath सरकार ने इसे विकास, निवेश और सामाजिक कल्याण का संतुलित दस्तावेज बताया है। पिछले वर्ष की तुलना में करीब 12.9 प्रतिशत अधिक इस बजट में सरकार ने महिलाओं, किसानों, युवाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर को केंद्र में रखा है। लेकिन सवाल यह है कि दावों और जमीन की हकीकत के बीच कितना अंतर है? आइए हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
बजट का आकार और सरकार का बड़ा दावा
सरकार का कहना है कि उसके कार्यकाल में करीब 6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं और राज्य की प्रति व्यक्ति आय दोगुनी होकर 1.20 लाख रुपये से अधिक हो गई है। किसानों की आय भी दोगुनी होने का दावा किया गया है। 9.12 लाख करोड़ का यह बजट केवल खर्च का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है यूपी अब “बीमारू” की छवि से बाहर निकल चुका है और विकसित राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार
महिला सशक्तिकरण इस बजट का प्रमुख स्तंभ बताया गया है। अनुसूचित जाति की गरीब बेटियों के विवाह के लिए 100 करोड़ रुपये और सामान्य वर्ग की गरीब बेटियों के विवाह के लिए 50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। मेधावी छात्राओं के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और सामाजिक आधार मजबूत होगा।
कृषि और किसानों पर विशेष जोर
उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। गन्ना किसानों के भुगतान के लिए 3000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। सरकार ने खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने की बात कही है। हालांकि किसानों की आय दोगुनी होने के दावे की वास्तविकता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में वास्तविक आय वृद्धि इस दावे की परीक्षा होगी।

रोजगार और युवा सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा
सरकार ने दावा किया है कि राज्य में बेरोजगारी दर घटकर 2.26 प्रतिशत रह गई है। 2.19 लाख नई सरकारी भर्तियों और 10 लाख रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। युवाओं को एक लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त कर्ज देने की योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। फरवरी 2024 के ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में 50 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन होने का हवाला देते हुए सरकार का कहना है कि इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा। हालांकि एमओयू और वास्तविक निवेश के बीच अंतर पर विशेषज्ञ नजर बनाए हुए हैं।

टेक्नोलॉजी आधारित विकास और नई अर्थव्यवस्था की दिशा
बजट में सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ना चाहता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए 225 करोड़ रुपये का प्रावधान, डेटा क्लस्टर सेंटर की स्थापना और टेक्नोलॉजी मिशन की घोषणा इसी रणनीति का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से राज्य में आईटी, डेटा प्रोसेसिंग और स्टार्टअप सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, जिससे युवाओं के लिए नए और आधुनिक रोजगार अवसर पैदा होंगे।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर बड़ा निवेश
ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए 65,926 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। हाइड्रोजन और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की योजना दीर्घकालिक औद्योगिक विकास की रणनीति का हिस्सा है। बुनियादी ढांचे में निवेश से औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र की मजबूती
स्वास्थ्य क्षेत्र को कुल बजट का 6 प्रतिशत आवंटित किया गया है। 60 जिलों में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित होने और 14 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना से स्पष्ट है कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने पर जोर है। असाध्य रोगों के इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। शिक्षा क्षेत्र को 12.4 प्रतिशत बजट आवंटन के साथ प्राथमिकता दी गई है, जिससे युवाओं को कौशल आधारित और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ा जा सके।

पर्यटन और सांस्कृतिक विकास
अयोध्या के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये और राष्ट्र प्रेरणा स्थल के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। पर्यटन को रोजगार सृजन का बड़ा साधन माना गया है। धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने की योजना है।
क्या सच में ‘दोगुना विकास’?
सरकार का दावा है कि आय, निवेश और रोजगार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। लेकिन आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट की सफलता क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। रोजगार के वास्तविक आंकड़े, किसानों की आय में स्थायी वृद्धि और निवेश परियोजनाओं की जमीनी प्रगति ही तय करेगी कि यह बजट ऐतिहासिक साबित होगा या केवल राजनीतिक दस्तावेज बनकर रह जाएगा।

9.12 लाख करोड़ रुपये का यह बजट महत्वाकांक्षी है और लगभग हर वर्ग को संबोधित करता है। महिलाओं से लेकर किसानों तक, युवाओं से लेकर उद्योग तक हर क्षेत्र के लिए घोषणाएं की गई हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन घोषणाओं का असर जमीन पर कितना दिखता है। आने वाले महीनों में यही तय करेगा कि यह बजट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देता है या नहीं।




