
देहरादून, 4 सितम्बर 2021
टोक्यो में चल रहे पैरालंपिक में उत्तराखंड के अर्जुन अवार्डी मनोज सरकार ने कांस्य पदक जीत लिया है। मनोज ने अपने शानदार प्रदर्शन से जापान के फुजीहारा को हरा कर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर दिया है। मनोज ने अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बनाकर ये सिद्ध कर दिया है कि हौसलों के आगे परेशानी कितनी भी बड़ी हो टिक नही सकती। बता दें कि मनोज सरकार का सामना जापान के फुजिहारा डेसुके से था। फुजिहारा को सेमीफाइनल में प्रमोद भगत ने मात दी थी। उनकी कामयाबी से प्रदेश में खुशी की लहर है। वहीं पीएम मोदी ने भी बधाई दी है।
बता दें कि मनोज सरकार का सामना जापान के फुजिहारा डेसुके से था। फुजिहारा को सेमीफाइनल में प्रमोद भगत ने मात दी थी। मनोज सरकार पहले गेम में पिछड़ रहे थे लेकिन फिर उन्होंने जबरदस्त वापसी की और 27 मिनट तक चले इस रोमांच गेम को 22-20 से अपने नाम किया। वहीं दूसरा गेम उन्होंने महज 19 मिनट में 21-13 से अपने नाम किया। उनकी इस कामयाबी पर पीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ‘मनोज का शानदार प्रदर्शन, बैडमिंटन में प्रतिष्ठित कांस्य पदक लाने के लिए उन्हें बधाई, आने वाले समय के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं’। वहीं खेल प्रेमियों ने मनोज के कास्य पदक जीतने पर सोशल मीडिया में बधाई संदेश का तांता लगा दिया है। मनोज की पत्नी रेवा सरकार ने बताया कि रिश्तेदारों ने फोन कर बधाइयां देना शुरू कर दी हैं।
आपको बता दें कि रुद्रपुर तराई के जिला मुख्यालय में गरीब परिवार में जन्मे मनोज सरकार टोक्यो ओलंपिक में कास्य जितने के बाद राष्ट्रीय फलक पर छाए हुए हैं। लेकिन मनोज को यह मुकाम आसानी से नहीं बल्कि बेहद संघर्षों के बाद हासिल हुआ है। आर्थिक तंगी के चलते मनोज को बचपन में साइकिल में पंचर जोड़ने, खेतों में दिहाड़ी पर मटर तोड़ने और घरों में पीओपी के काम करने पड़े थे। होनहार खिलाड़ी को वर्ष 2012 में फ्रांस में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में चंदे से जुटाए रुपयों से प्रतिभाग करना पड़ा था। बचपन में दवा के ओवरडोज से उनके एक पैर ने काम करना बंद कर दिया था। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते वह अच्छे डॉक्टर से पांव का इलाज नहीं करा पाए थे। उनकी मां जमुना सरकार ने मजदूरी से जुटाए रुपयों से उनको बैडमिंटन खरीदकर दिया था।







