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वक्फ संशोधन बिल पर संसद में घमासान: 8 घंटे की बहस में पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

वक्फ संशोधन बिल पर संसद में घमासान: 8 घंटे की बहस में पक्ष-विपक्ष आमने-सामने

नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार को तीखी बहस देखने को मिली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस बहस के लिए 8 घंटे का समय निर्धारित किया, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। जहां सरकार इसे पारदर्शिता और न्यायसंगत व्यवस्था लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे वक्फ संपत्तियों पर हमले के रूप में देख रहा है।

सरकार का रुख

गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि यह बिल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था और विपक्ष की भी यही मांग थी। कमिटी ने अपने सुझाव सरकार को सौंपे, जिन्हें कैबिनेट ने स्वीकृति दी। अमित शाह ने कहा, “अगर कोई बदलाव नहीं करने थे, तो फिर कमिटी का गठन ही क्यों किया गया? यह कांग्रेस के जमाने की कमिटी नहीं है, बल्कि विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया विधेयक है।”

विपक्ष का तीखा विरोध

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे वक्फ संपत्तियों को कमजोर करने की साजिश बताया। कांग्रेस के गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद और इमरान मसूद ने पार्टी का पक्ष रखा। गोगोई ने कहा, “यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को खत्म करने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनने की कोशिश है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए।”

समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, मोहिबुल्लाह नदवी और इकरा हसन ने भी विधेयक का कड़ा विरोध किया। अखिलेश यादव ने कहा, “यह विधेयक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए नहीं, बल्कि भारत के लोकतंत्र की मूल भावना पर भी हमला है। वक्फ संपत्तियों को सरकार के नियंत्रण में लेने की यह कोशिश निंदनीय है।”

एनडीए के सहयोगी दलों का समर्थन

विधेयक पर एनडीए के घटक दलों ने सरकार का समर्थन किया। लोजपा के अरुण भारती और जदयू के लल्लन सिंह ने इस विधेयक को पारदर्शिता बढ़ाने वाला बताया। लल्लन सिंह ने कहा, “इस विधेयक से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। विपक्ष सिर्फ राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहा है।”

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की नाराजगी

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी विधेयक की आलोचना की। उन्होंने कहा, “सरकार को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए था। ऐसा नहीं किया गया, जिससे यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को कमजोर करने की साजिश जैसा प्रतीत होता है।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक और रणनीति

विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ ने संसद में वक्फ (संशोधन) विधेयक के विरोध के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करने हेतु बैठक की। बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल, सपा के राम गोपाल यादव, राकांपा की सुप्रिया सुले, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह शामिल हुए।

बैठक में यह फैसला लिया गया कि विपक्ष इस विधेयक को राज्यसभा में भी रोकने की पूरी कोशिश करेगा। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला बताया और सरकार को इसे वापस लेने की चेतावनी दी।

वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर संसद में गहमागहमी चरम पर है। जहां सरकार इसे सुधारात्मक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन मान रहा है। अब देखना यह होगा कि यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो पाता है या नहीं। विपक्ष की रणनीति और सरकार का रुख आने वाले दिनों में इस पर बड़ा असर डाल सकता है।

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