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आरएसएस सर्टिफाइड मुख्यमंत्री: वक्फ बिल पर नीतीश के रुख से सियासी तूफान, आरजेडी का तीखा हमला

आरएसएस सर्टिफाइड मुख्यमंत्री: वक्फ बिल पर नीतीश के रुख से सियासी तूफान, आरजेडी का तीखा हमला

बिहार की राजनीति में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सियासी भूचाल आ गया है। इस विधेयक के समर्थन में खड़ी हुई जनता दल (यूनाइटेड) अब अपने ही गढ़ में घिरती नजर आ रही है। आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर एक तीखे पोस्ट के जरिये आरजेडी ने उन्हें “आरएसएस-प्रमाणित मुख्यमंत्री” तक कह डाला, जिससे बिहार की राजनीति में गरमाहट और बढ़ गई है।

राजद द्वारा एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई एक फोटोशॉप्ड तस्वीर में नीतीश कुमार को आरएसएस की ट्रेडमार्क वेशभूषा—सफेद शर्ट और खाकी निकर—में दिखाया गया है। इस तस्वीर के साथ लिखा गया, “आरएसएस सर्टिफाइड मुख्यमंत्री चीटीश कुमार”, जिसमें नाम को भी व्यंग्यात्मक अंदाज़ में बदला गया है। इस पोस्ट का सीधा संदेश था कि नीतीश कुमार अब भाजपा और आरएसएस की विचारधारा के समर्थक बन चुके हैं, और उन्होंने अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को त्याग दिया है।

यह हमला उस समय आया है जब वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में पारित किया गया, और इसमें जेडी(यू) और टीडीपी का समर्थन निर्णायक साबित हुआ। जेडी(यू) के 12 सांसदों ने इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जिससे पार्टी के भीतर ही बगावत की चिंगारी भड़क उठी है। पार्टी के पांच नेताओं ने विधेयक का विरोध करते हुए इस्तीफा दे दिया है, जिनमें मोहम्मद कासिम अंसारी, मोहम्मद शाहनवाज मलिक और मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी जैसे नाम प्रमुख हैं।

हालांकि, जेडी(यू) ने इन नेताओं के पार्टी से जुड़े होने से इनकार किया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि “न तो कासिम अंसारी और न ही शाहनवाज मलिक हमारे कार्यकर्ताओं का हिस्सा हैं।” लेकिन इससे पार्टी में उठे असंतोष की आग शांत नहीं हुई है।

वक्फ विधेयक के मुताबिक, सरकार वक्फ संपत्तियों के नियमन में ज्यादा हस्तक्षेप कर सकेगी और विवादों के निपटारे में उसकी भूमिका बढ़ जाएगी। मुस्लिम समुदाय के कई नेताओं ने इसे समुदाय के अधिकारों में कटौती करार दिया है। पूर्व राज्यसभा सांसद गुलाम रसूल बलियावी और वरिष्ठ नेता गुलाम गौस ने भी नीतीश कुमार के रुख पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

बिहार की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत है और यह समुदाय जेडी(यू) का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। लेकिन अब आरजेडी इस असंतोष को भुनाने में जुट गई है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वक्फ बिल को चुनावी मुद्दा बनाकर नीतीश और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया जाएगा।

इस साल नवंबर में संभावित विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वक्फ बिल को लेकर राजनीतिक घमासान और तेज होने की उम्मीद है। आरजेडी जहां इसे अल्पसंख्यक विरोधी कदम बताकर जेडी(यू) को घेर रही है, वहीं नीतीश कुमार के लिए यह दोधारी तलवार साबित हो सकता है—एक तरफ एनडीए की साझेदारी मजबूती की ओर, तो दूसरी तरफ अपने परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक का टूटता भरोसा।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मुद्दा बिहार की चुनावी दिशा तय कर सकता है। फिलहाल, आरजेडी का ‘आरएसएस सर्टिफाइड मुख्यमंत्री’ तंज सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में खूब गूंज रहा है।

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