फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे में रक्षा सहयोग, उन्नत तकनीक, इंडो-पैसिफिक रणनीति और ‘आत्मनिर्भर भारत’ प्रमुख एजेंडा हैं। मुंबई में दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक के साथ 3.25 लाख करोड़ रुपये की राफेल मेगा डील पर भी अहम चर्चा होनी है। यह दौरा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि भारत-फ्रांस संबंधों के अगले चरण की नींव माना जा रहा है।
1. मैक्रों का दौरा क्यों है रणनीतिक रूप से अहम?
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा साझेदारी पिछले एक दशक में गहरी हुई है। 2016 में 36 राफेल विमानों की पहली डील के बाद दोनों देशों ने पनडुब्बी निर्माण, इंजन तकनीक, अंतरिक्ष सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम किया है। चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता, हिंद महासागर में उसकी मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ सीमाई तनाव को देखते हुए भारत अपनी हवाई और समुद्री क्षमता को और मजबूत करना चाहता है। फ्रांस भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार मानता है। ऐसे में यह दौरा सामरिक समीकरणों को नया आयाम दे सकता है।

2. 3.25 लाख करोड़ की राफेल मेगा डील क्या है?
भारत सरकार ने 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। यह सौदा फ्रांस की कंपनी Dassault Aviation के साथ सरकार-से-सरकार (G-to-G) ढांचे में होगा।
डील की मुख्य विशेषताएं
- कुल 114 राफेल फाइटर जेट
- 18 विमान सीधे फ्रांस से ‘फ्लाई-अवे’ स्थिति में
- 96 विमानों का निर्माण भारत में
- 50% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग
- कुल लागत करीब 30 अरब यूरो (लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये)
इस पैकेज में अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम (जैसे स्कैल्प), एयर-टू-एयर मिसाइलें, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, ट्रेनिंग और दीर्घकालिक रखरखाव भी शामिल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी रक्षा खरीद में से एक है।

3. F-5 राफेल क्या है और क्यों चर्चा में है?
भारत के पास वर्तमान में F-3 वर्जन के राफेल हैं, जिन्हें 4.5 जेनरेशन फाइटर जेट माना जाता है। नई डील में F-4 और संभावित रूप से F-5 वर्जन शामिल हो सकते हैं।
F-4 वर्जन
- बेहतर रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम
- अपग्रेडेड एवियोनिक्स
- नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर क्षमता
F-5 वर्जन (सुपर राफेल)
- उन्नत स्टील्थ फीचर्स
- AI आधारित निर्णय प्रणाली
- ‘किल-वेब’ तकनीक (एक साथ कई प्लेटफॉर्म का समन्वय)
- ड्रोन इंटीग्रेशन
- अधिक शक्तिशाली इंजन और लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता
बताया जा रहा है कि F-5 वर्जन 2030 तक डिलीवर किया जा सकता है। इसे छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
पिछली राफेल डील और अब क्या बदलेगा?
2016 की डील के तहत भारत ने 36 राफेल विमानों को सीधे फ्रांस से खरीदा था। उस समय वायुसेना की तत्काल जरूरतों को पूरा करना प्राथमिकता थी। अब 114 विमानों की प्रस्तावित डील केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत में बड़े पैमाने पर निर्माण और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर आधारित है।
इस बार—
- घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी
- एयरोस्पेस सेक्टर में रोजगार और निवेश बढ़ेगा
- लंबी अवधि में भारत को आत्मनिर्भरता मिलेगी
- उन्नत वर्जन के कारण तकनीकी बढ़त हासिल होगी
यानी यह डील मात्रा और गुणवत्ता दोनों स्तर पर बदलाव लाएगी।
ऑपरेशन सिंदूर में राफेल की भूमिका
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान राफेल की क्षमताओं ने भारतीय वायुसेना की ताकत को नई पहचान दी। लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमता और आधुनिक मिसाइल सिस्टम के कारण राफेल ने रणनीतिक बढ़त दिलाई। राफेल की ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) क्षमता, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और मल्टी-रोल ऑपरेशन की क्षमता ने इसे निर्णायक प्लेटफॉर्म बनाया। इस ऑपरेशन के बाद राफेल को भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाने लगा। यही कारण है कि अब भारत राफेल बेड़े का विस्तार कर अपनी हवाई श्रेष्ठता को स्थायी रूप से मजबूत करना चाहता है।
आगे क्या?
मैक्रों और मोदी की बैठक में रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर की संभावना है। साथ ही ‘भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026’ की शुरुआत भी होगी। यदि 114 राफेल की डील अंतिम रूप लेती है और F-5 वर्जन शामिल होता है, तो यह भारत की सैन्य शक्ति, तकनीकी क्षमता और वैश्विक रणनीतिक स्थिति को नई ऊंचाई दे सकता है। यह सौदा केवल फाइटर जेट खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन का बड़ा संकेत है।




