प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती सुर्खियों में हैं। मामला सामने आते ही राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। एक ओर पुलिस जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, तो दूसरी ओर शंकराचार्य ने इसे “नीच प्रहार” बताते हुए खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। आखिर यह मामला क्या है, शंकराचार्य ने क्या कहा और आगे क्या हो सकता है—पूरी तस्वीर समझते हैं।
क्या है मामला और कब दर्ज हुई FIR?
प्रयागराज के झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि साक्ष्यों और बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा जाता है और इनकी जांच प्रक्रिया गोपनीय और विधिक दायरे में की जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस पीड़ित पक्ष के बयान, मेडिकल साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ती है। यह मामला सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और समर्थकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, तो कई इसे वैचारिक टकराव से जोड़कर देख रहे हैं।

शंकराचार्य की पहली प्रतिक्रिया: ‘इतना नीच प्रहार होगा, सोचा नहीं था’
FIR दर्ज होने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अंदेशा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है, लेकिन “इतना नीच प्रहार होगा, इसकी कल्पना नहीं थी।” उन्होंने कहा कि यह हमला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि वैचारिक है। उनके मुताबिक, “धर्म युद्ध शुरू हो चुका है।” उन्होंने यह भी कहा कि वे इस पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में देख रहे हैं। शंकराचार्य ने अपने बयान में संकेत दिया कि वे इसे सिर्फ कानूनी कार्रवाई नहीं मानते, बल्कि इसे व्यापक विचारधारात्मक संघर्ष का हिस्सा समझते हैं। उनके अनुसार, यह लड़ाई सिद्धांतों और धार्मिक मूल्यों से जुड़ी है।

गिरफ्तारी और जांच पर क्या बोले?
गिरफ्तारी की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “जो करना है करें, हम तैयार बैठे हैं। कभी भागे हों तो बताइए।” उन्होंने यह भी कहा कि जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उनके शब्दों में, “जिस पर आरोप लगता है, वह खुद को गलत सिद्ध करने के लिए तैयार रहता है, हम भी तैयार हैं।” उन्होंने साफ किया कि चाहे यहीं पूछताछ हो या कहीं और ले जाकर, वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। उनका कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया से भागने वाले नहीं हैं और जांच एजेंसियों के हर सवाल का जवाब तथ्यों के साथ देंगे।

आरोप लगाने वाले पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने आरोप लगाने वाले व्यक्ति की मंशा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति का आपराधिक इतिहास रहा है और वह खुला घूम रहा है। उनका आरोप है कि “अपराधियों पर कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि हमें निशाना बनाया जा रहा है।” उन्होंने इसे न्याय व्यवस्था में असंतुलन बताया और कहा कि उन्हें सैकड़ों अधिवक्ताओं और समर्थकों का साथ मिल रहा है। अपने बयान में शंकराचार्य ने इसे “धर्म युद्ध” बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के नाम पर जो कुछ हो रहा है, उसके खिलाफ वे खड़े हैं और यह संघर्ष अब रुकेगा नहीं। उन्होंने खुद की तुलना “सत्य” से करते हुए कहा कि “सूर्य की आभा को कोई ढक नहीं सकता।” उनका कहना है कि सत्य अंततः सामने आएगा और उन्हें न्याय मिलेगा।

आगे क्या?
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में बयान, साक्ष्य और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। जांच एजेंसियां तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करती हैं। मामले का अंतिम फैसला अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और दलीलों पर निर्भर करेगा। न्यायिक प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों को अपनी-अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और धार्मिक बहस का विषय भी बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा, पुलिस की कार्रवाई और अदालत की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल जांच जारी है और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।




